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IND vs BAN: पहले डे नाइट टेस्ट मैच से पहले पूर्व BCCI क्यूरेटर ने बताया कैसी हो पिच

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सौरभ गांगुली का मानना है कि दिन-रात का टेस्ट मैच खेल के सबसे बड़े प्रारूप को उसकी खोई हुई पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। भारत को 22 नवंबर से कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स स्टेडियम में बांग्लादेश के साथ अपना पहला दिन-रात का टेस्ट मैच खेलना है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मंगलवार को ही भारत के साथ कोलकाता में पहले दिन-रात के टेस्ट मैच को हरी झंडी दी। वहीं बीसीसीआई के पूर्व मुख्य पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह ने अगले महीने होने वाले इस पहले टेस्ट मैच की पिच को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने बताया कि भारत में आयोजित होने वाले इस पहले डे-नाइट टेस्ट मैच में किस तरह की पिच रखनी चाहिये।

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दलजीत सिंह ने भारत में होने वाले पहले दिन रात्रि टेस्ट मैच के दौरान विकेट पर अधिक घास रखने और ओस से बचने के लिये आउटफील्ड पर कम घास रखने की सलाह दी है।

दलजीत ने बताया कैसे बचेंगे ओस की समस्या से

दलजीत ने बताया कैसे बचेंगे ओस की समस्या से

भारतीय क्रिकेट में 22 साल तक सेवा देने के बाद पिछले महीने ही बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर पद से रिटायर हुए दलजीत ने कहा, ‘ओस मुख्य चिंता होगी। इसमें कोई संदेह नहीं। उन्हें समझना होगा कि आप इससे बच नहीं सकते हो।'

उन्होंने कहा, ‘इससे बचाव के लिये आउटफील्ड में घास कम रखनी होगी और पिच पर आम घास से अधिक लंबी घास रखनी पड़ेगी। आउटफील्ड में जितनी अधिक घास होगी, ओस की परेशानी उतनी ज्यादा होगी।'

ऐसे रख सकते हैं गुलाबी गेंद की चमक बरकरार

ऐसे रख सकते हैं गुलाबी गेंद की चमक बरकरार

इस मैच के दोपहर बाद एक बजकर 30 मिनट से शुरू होने की संभावना है और खेल रात आठ बजकर 30 मिनट तक चल सकता है। बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने ईडन गार्डन्स में 22 नवंबर से शुरू होने वाले टेस्ट मैच को गुलाबी गेंद से खेलने पर सहमति जतायी है। इस दिन रात्रि टेस्ट मैच की तैयारियों में हालांकि बहुत कम समय बचा है। बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) को हालांकि गुलाबी गेंद से मैचों के आयोजन का अनुभव है।

दलजीत का मानना है कि गुलाबी गेंद की चमक लंबे समय तक बनाये रखने के लिये पिच पर अधिक घास रखनी होगी। उन्होंने और उनकी टीम ने 2016 में दलीप ट्राफी टूर्नामेंट के दौरान ऐसा किया था जब मैच ग्रेटर नोएडा में दूधिया रोशनी में खेले गये थे।

उन्होंने कहा, ‘गुलाबी गेंद जल्दी गंदी हो जाती है और इसलिए उन्हें पिच पर अधिक घास रखनी होगी। आपको याद होगा जबकि एडीलेड में (2017 में) पहला दिन रात्रि टेस्ट मैच खेला गया था तो उन्होंने पिच पर 11 मिमी घास रखी थी। आपको इतनी घास को तैयार करना होगा। आप मैच के एक दिन पहले इसे नहीं काट सकते या फिर पिच धीमी खेलेगी। '

मैच से 2 दिन पहले करना होगा यह काम

मैच से 2 दिन पहले करना होगा यह काम

दलजीत ने कहा, ‘(दलीप ट्राफी मैचों के दौरान) ओस एक मसला था, गेंद वास्तव में गंदी हो जाती थी। पिच पर सात मिमी घास थी जबकि अमूमन घास 2.5 से चार मिमी लंबी होती है। घास लंबी होने का मतलब है कि गेंद बहुत अधिक सीम करेगी।'

एक अन्य क्यूरेटर ने गोपनीयता की शर्त पर मैच से दो तीन दिन पहले से आउटफील्ड की घास पर पानी न डालने की सलाह दी।

कुछ इस तरह की पिच पर होगा रोमांचक मैच

कुछ इस तरह की पिच पर होगा रोमांचक मैच

उन्होंने कहा, ‘ओस मसला होगा लेकिन तब बहुत अधिक ठंड नहीं रहेगी। सुपरसोपर्स के अलावा ओस से निबटने में उपयोगी रसायनों का उपयोग किया जा सकता है। आउटफील्ड में काफी घास काटनी होगी। मैच से दो दिन पहले पानी डालना बंद करना होगा क्योंकि इससे नमी बन जाएगी। '

उन्होंने कहा, ‘आउटफील्ड में हम अमूमन सात से आठ मिमी घास रखते हैं लेकिन दिन रात्रि टेस्ट मैच के लिये यह छह मिमी रखी जा सकती है। इससे आप ओस का प्रभाव कम कर सकते हैं लेकिन आप प्राकृतिक परिस्थितियों से पूरी तरह नहीं निबट सकते हो। '

Story first published: Wednesday, October 30, 2019, 17:31 [IST]
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