
इंग्लैंड के शाही लोगों के साथ निवेश का किया था दावा
इस दौरान मोदी ने क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के बेटे प्रिंस एंड्रयू समेत कई शाही लोगों के भी इस प्रोजेक्ट में शामिल होने का दावा किया था। मोदी ने अपने प्रस्ताव में दुनिया भर के कैसंर सेटर्स का इस्तेमाल कर क्रांतिकारी सिंगल डोज रेडियोथेरेपी कराने का विकल्प दिया था जो कि एक बार में मरीज का जीवन 7 साल तक बढ़ा देगी।
अखबार ने गिल मग के हवाले से लिखा,' ललित मोदी ने दावा किया था कि उनकी पत्नी मीनल भी इस थेरेपी से गुजरी थी जिनका निधन साल 2018 में हुआ है। इस थेरेपी की मदद से उनकी पत्नी की उम्र के 7 साल बढ़ गये थे।'

ललित मोदी ने आरोपों से किया है इंकार
गिल ने अपने आरोपों में आगे बात करते हुए कहा कि मोदी ने अपने निवेशकों में थाईलैंड के पूर्व प्रधानमंत्री थक्सिन शिनावतारा के भी शामिल होने की झूठी बात कही। मग ने बताया कि उन्हें बताया गया कि 2019 की शुरुआत में प्रोजेक्ट के फ्लॉप हो जाने के बाद उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला और इसी के चलते वो रेनॉल्डस पॉर्टर चैम्बरलिन लॉ फर्म के मैथ्यू इवान्स के जरिये कानूनी मुकदमा करने की तैयारी की है।
ललित मोदी के वकील ने द संडे टाइम्स को दिये अपने बयान में कहा,' यह दुर्भाग्य की बात है कि कई सारे मरीजों का सफलता पूर्वक इलाज करने के बाद प्रोजेक्ट को उतनी फंडिंग नहीं मिल सकी जिसकी दरकार थी और कंपनी के दिवालिया हो जाने के चलते प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा।'

2010 में भारत छोड़ भागे थे ललित मोदी
इस हाई प्रोफाइल केस की सुनवाई लंदन हाई कोर्ट में अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि ललित मोदी ने साल 2010 में आईपीएल से जुड़ी कॉन्ट्रोवर्सी और घोटाले के आरोप लगने के बाद भारत छोड़ दिया और लंदन शिफ्ट हो गये थे।
मोदी की ओर से दिये गये बयान में कहा गया है,'मिसेज मग की ओर से लगाये गये आरोपों और पूरा मुआवजे की मांग को मिस्टर मोदी ने इंकार किया है। अब इस मुकदमे का फैसला हाई कोर्ट डिसाइड के जरिये होगा। मोदी इस मामले पर अभी कोई बयान नहीं दे सकते हैं औऱ उन्होंने साफ किया है कि भारतीय कोर्ट में भारतीय अधिकारियों की ओर से उन पर किसी भी तरह का क्रिमिनल केस नहीं चल रहा है।'


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