
दक्षिण अफ्रीका से शुरु हुई थी चीयरलीडर्स की कहानी
चीयरलीडर्स के नाम से तो अब हर कोई परिचित है। क्रिकेट में मात्र ट्वेंटी-ट्वेंटी के खेलों मे ही चीयरलीडर्स का प्रयोग होता है। इसकी शुरूआत दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। दक्षिण अफ्रीका में आयोजित पहले ट्वेंटी ट्वेंटी विश्वकप के दौरान चीयरलीडर्स का प्रयोग शुरू हुआ था।

छोटे कपड़ों में कमर मटाकर लोगों का मनोरंजन
चीयरलीडर्स का नाम जब सामने आया तो लोगों के मन में यह बात उठी कि इसका मतलब क्या है और ये मैदान में करेंगी क्या? लेकिन जैसे ही लोगों को मालूम चला कि ये चीयरलीडर्स वो कुछ सुंदरियां होंगी जो कम कपड़ों में क्रिकेट के हर चौके-छक्के और विकेट गिरने पर मोहक अंदाज में दर्शकों का मनोरंजन करेंगी तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

चीयरलीडर्स मामले में माल्या रहे सबसे आगे
बंगलोर में जब विजय माल्या की वेरसिटी चीयरलीडर्स ग्रुप की सुंदरियों ने सड़क पर परेड की तो लोग उन्हें देखने को मचल उठे। आईपीएल 2008 में माल्या ने अमेरिका व्हाइटचीफ ग्रुप की चीयरलीडर्स को मैचों के दौरान मनोरंजन के लिए बुलाया तो 2009 में वेरसिटी ग्रुप की चीयरलीडर्स को बुलाया गया।

केकेआर में बला की सुंदरियां तो चेन्नई में हुआ ऑडिशन
कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक शाहरुख खान ने भी एक रिएलिटी शो ‘नाइट्स एंड एजल्स' के जरिए छह खूबसूरत बालाओं को अपनी चीयरलीडर बनाया। इनमें दो स्कूली लड़कियां भी थीं। इसी तरह, चेन्नई सुपर किंग्स की चीयरलीडर्स भी तमिल चैनल पर एक कांटेस्ट के जरिए चुनी गई।


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