धोनी को दोस्त बताने वाले मोची की इरफान पठान ने की मदद, दान किये इतने हजार
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद लोगों की मदद करते नजर आ रहे हैं। हाल ही में एक क्रिकेट मैग्जीन में छपी रिपोर्ट के अनुसार इरफान पठान ने एक मोची की मदद की है जो कि पिछले कुछ समय से कोरोना वायरस के चलते परेशान चल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह कोई आम मोची नहीं बल्कि आईपीएल की फ्रैंचाइजी चेन्नई सुपर किंग्स के आधिकारिक मोची हैं। क्रिकेट मैग्जीन में आर भास्करन के बारे में रिपोर्ट छपने के बाद इरफान पठान की उन पर नजर गई और उन्होंने मदद के लिये हाथ बढ़ाया।
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रिपोर्ट के अनुसार 1993 के बाद से भास्करन ने चेन्नई में आयोजित हुए सभी अंतर्राष्ट्रीय मैचों के गवाह बने है। पिछले 12 साल से वह चिदंबरम स्टेडियम के बाहर वल्लाजाह रोड पर फुटपाथ पर बैठकर काम करते हैं।
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कोरोना के चलते रोजी रोटी हुई मुश्किल
कोरोना वायरस से पहले आर भास्करन मैच के दिनों में खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के एरिया के बाहर एक छोटे से कमरे में बैठते थे लेकिन कोरोना वायरस के चलत आईपीएल फिलहाल अनिश्चितकाल के लिये टल गया है और ऐसे में भास्करन के लिये अपना परिवार चलाने में मुश्किल आ रही है।
इस बारे में जब इरफान पठान को पता चला तो उन्होंने भास्करन के परिवार की 25 हजार रुपये देकर मदद की। इरफान पठान के मदद की जानकारी उसी वेबसाइट ने अपने आधिकारिक ट्विटर पर पोस्ट की।

सचिन के पैड भी किये थे ठीक
रिपोर्ट के अनुसार भास्करन को तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के साथ करार था जिसके तहत टीएनसीए भास्करन को एक दिन के काम के लिए 1000 रुपये देता है। इसके अलावा भास्करन को खिलाड़ी और अधिकारियों से भी काम करने के अलग से पैसे मिल जाते थे। इस बारे में बात करते हुए भास्करन ने बताया कि जब मैच नहीं होते थे तो भी वह दिन के 300-500 रुपये कमा लेते थे। इस दौरान उन्होंने बताया कि एक बार सचिन तेंदुलकर के पैड भी उन्होंने ठीक किये थे।
उन्होंने कहा, 'उनके (सचिन) पैड काफी अलग थे। वे आजकल के सिंथैटिक पैड की तरह नहीं थे। जब मैंने उनके पैड ठीक किए तो उन्होंने मेरे परिवार के लिए आईपीएल टिकट दिलाए। बाद में मुलाकात भी की।'

धोनी के साथ है दोस्ती, चाहते हैं कि तमिल में बात करें
रिपोर्ट में भास्करन के हवाले से लिखा गया है, 'मैंने महेंद्र सिंह धोनी को 2005 से देखा है, जब वह पहली बार चेपॉक आए थे। बाद में उन्होंने मेरे साथ चाय भी पी। वह मुझसे कहते कि मैं उनसे तमिल में बात करूं। वह खुद भी कोशिश करते हैं कि इस भाषा को बोल सकें। वह मुझे 'माछी' बुलाते हैं, जिसका मतलब भाई होता है। हम दोस्त की तरह बात करते हैं।'
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