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क्या पाकिस्तान की पुंगी बजाने के लिए इंग्लैंड से हार गया भारत ?

नई दिल्ली: कभी-कभी हार में भी जीत छिपी होती है। विरोधियों की पुंगी बजाने के लिए कभी-कभी हारना भी पड़ता है। ये खेल में खेल है। क्या विश्वकप में पाकिस्तान का गेम ओवर करने के लिए भारत, इंग्लैंड से हार गया ? अगर ये मैच भारत जीत जाता तो पाकिस्तान की सेमीफाइनल में जाने की राह आसान हो जाती। लेकिन भारत की हार से अब इस विश्वकप में पाकिस्तान की किस्मत अगर- मगर में फंस गयी है। विश्वकप प्रतियोगिता के पहले छह मुकाबलों में भारत एक भी मैच नहीं हारा था। जो बैटिंग लाइन अप थी उससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि भारत 338 का टारगेट भी हासिल कर लेगा। लेकिन टीम इंडिया के बल्लेबाजों का रवैया देख कर लोग हैरान और परेशान हो गये। दो दिन पहले पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर बासित अली ने कहा था कि भारत, पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने के लिए मैच हार भी सकता है। वह नहीं चाहता कि पाकिस्तान सेमीफाइनल खेले। भारत सचमुच इंग्लैंड से हार गया।

क्या जीतने के लिए खेल रहा था भारत ?

क्या जीतने के लिए खेल रहा था भारत ?

भारत एक बड़े टारगेट 338 का पीछा कर रहा था। राहुल ने स्ट्राइक ली। क्रिस वोक्स का पहला ही ओवर मेडन। सबने सोचा राहुल शायद नजरें जमा रहे हैं। लेकिन जब वोक्स ने अपने शुरू के तीन ओवर लगातार मेडन फेंक दिये तो लोग हैरान और परेशान हो गये। राहुल तीसरे ओवर की तीसरी गेंद पर बिना खाता खोले बिना चलते बने। क्रीज पर रोहित शर्मा और विराट कोहली थे। ये भी वोक्स के खिलाफ रन नहीं बना पाये। क्या यह बात गले उतरने वाली है कि रोहित और कोहली शॉट नहीं खेल पा रहे थे ? मिचेल स्टार्क जैसे खतरनाक गेंदबाज की घज्जियां उड़ाने वाले रोहित- कोहली आखिर वोक्स के आगे खामोश क्यों थे ? ये दोनों, इंग्लैंड के औसत गेंदबाज वोक्स की 18 गेंदों पर एक भी रन नहीं बना सके। राहुल के जीरो पर आउट होने के बाद रोहित और कोहली ने पहले 10 ओवरों की 42 गेंदों पर एक भी रन नहीं बनाया। पहली 60 गेदों में केवल पांच चौके आये। जाहिर है ये बल्लेबाजी बड़े लक्ष्य को हासिल करने वाली नहीं थी।

हार्दिक- पंत के बाद बेपटरी हुई गाड़ी

हार्दिक- पंत के बाद बेपटरी हुई गाड़ी

हार्दिक पांड्या और ऋषभ पंत जब खेल रहे थे तब भारत की उम्मीदें बनी हुईं थीं। 39 वें ओवर में हार्दिक के तीन लगातार चौकों से कुल 16 रन आये। अब तेज खेलना जरूरी था। छक्का मारने की कोशिश में पंत 40 वें ओवर की पहली गेंद पर कैच हो गये। 40 ओवर के बाद जरूरी रन रेट 10.4 हो गया था। अब भारत को एक बड़े ओवर की जरूरत थी। जब आदिल रशीद 42 वां ओवर फेंकने आये तो लगा कि इस ओवर में चौके-छक्के लगेंगे। क्रीज पर धोनी और पांड्या मौजूद थे। उनके लिए ये बायें हाथ का काम था। लेकिन रशीद के इस ओवर में केवल पांच रन ही बने। जब रन रेट 10 से ऊपर हो, धोनी और पांड्या के हाथ में बल्ला हो, सामने स्पिनर हो, हाथ में पांच विकेट भी हों, इसके बाद भी जब केवल 5 रन ही बने तो सवाल उठना लाजिमी है।

भारत का पहला छक्का 50 वें ओवर में

भारत का पहला छक्का 50 वें ओवर में

45 वें ओवर में हार्दिक पांड्या आउट हो गये। अब मैदान पर धोनी और केदार जाधव थे। भारत को जीत के लिए आखिरी पांच ओवरों में 71 रन बनाने थे। कम मुश्किल था लेकिन धोनी या जाधव ने रनों की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश ही की नहीं की। एक ओवर में करीब 14 रन बनाने की दरकार थी। लेकिन धोनी और जाधव ऐसे खेलते रहे जैसे वे टेस्ट मैच खेल रहे हों। छक्का लगाने में मशहूर टीम इंडिया का पहला छक्का आखिरी ओवर में तब आया जब सब कुछ खत्म हो चुका था। धोनी जब 50वें ओवर में छक्का मार सकते थे तब उन्होंने 45 वें ओवर में ऐसी कोशिश क्यों नहीं की ? भारत ने 45 वें ओवर में 7 रन, 46 वें ओवर में 9 रन, 47 वें ओवर में 5 रन, 48 वें ओवर में 6 रन बनाये। क्या डेथ ओवरों में भारत ने पहले कभी ऐसा खेल दिखाया था ? आखिरी पांच ओवरों की 20 गेंदों पर केवल एक रन बने। 6 गेंदों पर तो एक भी रन नहीं बने। रिक्वायर्ड रन रेट बढ़ते जा रहा था और धोनी- जाधव ठुक-ठुक कर रहे थे। छक्का मारने की की कोशिश में अगर आउट भी हो जाते तो कोई सवाल नहीं पूछता, लेकिन क्रीज पर टाइम पास करने का मतलब क्या है ? अब तो यही कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को ठिकाने लगाने के लिए भारत जानबूझ कर ये मैच हार गया।

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Story first published: Monday, July 1, 2019, 21:15 [IST]
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