
अंतिम ओवर में गेंदबाजी करना होता है मुश्किल
बुमराह ने कहा कि ऐसा हो जाता है, किसी भी हालात में अंतिम ओवर में गेंदबाजी करना हमेशा मुश्किल होता है। यह दोनों तरफ जा सकता है और कभी कभार तो इसमें आधी-आधी संभावनाएं ही होती हैं। उन्होंने कहा कि आप अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करते हो और आप अपनी रणनीति में स्पष्ट होते हो। कुछ दिन तो यह कारगर होता है और कई दिन यह कामयाब नहीं हो पाता। इसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम मैच का अंत अपने पक्ष में करना चाहते थे लेकिन यह नहीं हो सका तो कोई बात नहीं।

छोटा था लक्ष्य
बुमराह ने कहा कि टास जीतने के बाद आस्ट्रेलिया के पास यह चीज फायदेमंद थी कि उन्हें पता था कि उन्हें क्या करना है क्योंकि उनके सामने लक्ष्य था जबकि भारतीय टीम पारी को प्रतिस्पर्धी स्कोर बनाने में लगी रही। उन्होंने कहा कि जब आपके सामने लक्ष्य होता है तो यह थोड़ा अलग होता है। यह छोटा लक्ष्य था, इसलिए एक बाउंड्री लगाने के बाद आपको ज्यादा जोखिम उठाने की जरूरत नहीं थी। लेकिन पहले बल्लेबाजी करते हुए हम चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाने की कोशिश कर रहे थे इसलिये शायद यह थोड़ा अलग था। वे बाउंड्री लगाने के बाद स्ट्राइक रोटेट कर रहे थे।
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ऐसा रहा आखिरी ओवर
बता दें कि भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड के सामने 127 रनों का लक्ष्य रखा। भारत की तरफ से ओपनर लोकेश राहुल ने 36 गेंदों में 50 रनों की पारी खेली। जवाब में इंग्लैंड टीम के शुरूआती 2 विकेट जल्दी गिर गए लेकिन ग्लेन मैक्सवेल की 56 रनों की पारी ने मैच में रोमाचंक मोड़ ला दिया। आखिरी ओवर में उमेश आए। उनके सामने ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बल्लेबाज जे. रिचर्डसन (नाबाद 7) और पैट कमिंस (नाबाद 7) थे। इन दोनों ने उमेश पर एक एक चौका लगाया। कमिंस ने 5वीं गेंद चार रन के लिए भेजी और अंतिम गेंद पर दो रन लेकर टीम को जीत दिला दी।


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