सचिन तेंदुलकर के नाम हुआ पिछले 20 साल का स्पोर्टिंग मोमेंट, 2011 WC में ऐसा था वो खास पल
नई दिल्ली: भारतीय टीम के लिए विश्व कप 2011 की जीत एक गौरवशाली क्षण था जिसमें टीम इंडिया ने अपने महानायक सचिन तेंदुलकर को भी उनके अंतिम विश्व कप में शानदार तोहफा दिया था। 2011 की विश्व कप विजय के बाद भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के शानदार क्षण को सबसे बड़े लॉरियस स्पोर्टिंग मोमेंट 2000-2020 (पिछले बीस साल में) पुरस्कार के लिए चुना गया है।
भारत टीम की विश्व कप जीत के पल को 'कैरिड ऑन द शोल्डर ऑफ ए नेशन' का शीर्षक दिया गया है। 2011 विश्व कप जीत हमेशा भारतीय क्रिकेटरों और प्रशंसकों की यादों में रहेगी। जीत के बाद भारतीय टीम ने सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठा लिया था जहां घरेलू दर्शकों के सामने भावुक सचिन को महान सम्मान किया गया था।

सचिन के नाम 'खास खेल पल' का अवार्ड-
सचिन को कंधे पर उठाना आज भी काफी लोगों के दिलों में खेल के बड़े भावुक क्षणों में शुमार हैं। यह सचिन के लिए अंतिम विश्व कप था इससे पहले वे पांच बार इस टूर्नामेंट में खेल चुके थे। सचिन ने 1992, 1996, 1999, 2003 और 2007 में इससे पहले खेला था लेकिन एक बार भी भारतीय टीम ट्रॉफी उठाने में कामयाब नहीं हुई थी। ऐसे में टीम इंडिया ने सचिन के करियर में आखिरी विश्व कप को जीतकर उनको बेमिसाल तोहफा दिया था।

2011 का वो भावुक पल कुछ ऐसा था-
2011 का विश्व कप एशिया में हुआ था और भारत साफ तौर पर जीत का बड़ा दावेदार था। उस प्रतियोगिता में धोनी की कप्तानी में भारत ने मात्र एक मुकाबला दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हारा था।
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भारतीय टीम सेमीफाइनल में पाकिस्तान को रौंदकर फाइनल में गई थी जहां उसका मुकाबला श्रीलंका से हुआ था। फाइनल में लंका ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने का फैसला किया था जिसमें जयवर्धने के शतक के दम पर लंका ने 6 विकेट के नुकसान पर 274 रन बनाए थे।

सचिन के करियर का पहला और अंतिम ODI विश्व कप खिताब-
इस लक्ष्य के जवाब में भारत ने केवल 31 रनों के अंदर ही सचिन तेंदलुकर और वीरेंद्र सहवाग जैसे धुरंधरों को गंवा दिया था। पूर्व कप्तान एमएस धोनी और बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर फाइनल मैच में नायक थे, उन्होंने श्रीलंका के 275 के लक्ष्य को कड़ी चुनौती देते हुए क्रमशः 91 * और 97 रन बनाए थे। धोनी ने नुवान कुलसेकरा पर विजयी छक्का जड़ने के तुरंत बाद, सभी भारतीय खिलाड़ियों को स्तब्ध कर दिया और कुछ खिलाड़ियों की आंखों में तब वानखेड़े में थे। यह 28 वर्षों के बाद भारत की दूसरी विश्व कप जीत थी और तेंदुलकर के शानदार क्रिकेट करियर में अंतिम बड़ी उपलब्धि भी था।
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