दिल्ली के फिराजशाह कोटला में दूसरा मैच जीतकर भारत ने पहले मैच की हार का बदला लेते हुये सीरीज में बराबरी हासिल कर ली है! आइये इस जीत के कारणों पर डालते हैं एक नजर-
1. टॉस जीतकर माही ने लिया सही निर्णय
कोटला में टॉस जीतकर धोनी ने पहले बल्लेबाजी का जो फैसला लिया वो कारगर सिद्ध हुआ। हालांकि कोच्चि में भी धोनी ने टॉस जीता था, लेकिन वहां वो सही फैसला लेने में चूक गये थे। वेस्टइंडीज को पहले खेलने का मौका देकर वहां भारत ने मैच गंवा दिया। दिल्ली में पहले खेलकर भारत ने ढाई सौ के पार स्कोर पहुंचाकर वेस्टइंडीज को दबाव में ला दिया। हालांकि इस हार के लिये उनके बल्लेबाज कम दोषी नहीं हैं। जो एक निश्चित जीत को हार के रूप में गले लगा बैठे।
2. तीन बड़ी पारियों ने दिया मजबूत स्कोर
विराट कोहली, सुरेश रैना और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अर्धशतकों ने टीम को लड़ने लायक स्कोर दिया। रैना और कोहली की शतकीय साझेदारी ने टीम को सही रास्ते पर डाला। वनडे में अगर दो या तीन बड़ी साझेदारियां हो जाती हैं तो फिर बोर्ड पर बड़ा स्कोर टंग जाता है।
लक्ष्य का पीछा करने वाले टीम अगर सही रन रेट के हिसाब से नहीं खेल पाती है तो फिर बल्लेबाज बड़ा शाट मारने के चक्कर में विकेट गंवा बैठते हैं। हालांकि डे-नाइट गेम में बाद में गेंदबाजी करने वाली टीम को ओस जैसी मुश्किल का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन इंटरनेशनल लेबल पर इन समस्याओं से निपटना गेंदबाजों को आना चाहिये। फील्डरों को भी गेंद का गीलापन पोंछकर गेंदबाज की मदद करते रहना चाहिये।
3. विरोट कोहली का फार्म में लौटना बोनस की तरह
विराट कोहली ने शानदार पचासा जड़ा। जीत की खुशी के साथ ही कोहली का फार्म में आना बोनस की तरह रहा। हालांकि इस मैच में उन्होंने अपना डाउन बदला। वन डाउन की जगह वो टू डाउन पर आये, लेकिन उनको रन बनाते देख सचमुच अच्छा लगा। सचिन तेंदुलकर के रिटायरमेंट के बाद कोहली ऐसे बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचना बना चुके हैं जो मैच विनर हैं।
कोहली का हर बड़ा नॉक टीम को जीत दिलाता है। या यों कहें कि कोहली का बल्ला चला तो जीत पक्की। अब कोहली को फार्म बरकरार रखनी होगी। इससे विश्व कप में भारत का भविष्य भी तय होगा।
4. धोनी का तूफान और रैना ने बरसाये रन
सुरेश रैना जब रन बरसाते हैं तो विपक्षी टीम उसमें भीग जाती है। इधर उनमें परिपक्वता आयी है और वो जिम्मेदारी के साथ अपना काम कर रहे हैं। दिल्ली में शानदार अर्धशतक इसी का सुबूत है। वहां धोनी हमेशा की तरह मारक रहे। माही ऐसे किलर हैं जिसके वार से बच पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है।
5. तेज गेंदबाजों ने किया नायाब प्रदर्शन
हमारे तेज गेंदबाजों से मैच जिताने की उम्मीद कम ही की जाती है। लेकिन इस मैच में तीनों तेज गेंदबाजों ने बढ़िया गेंदबाजी की। खासकर मोहम्मद शमी ने लगातार दूसरे मैच में चार विकेट खोकर इंग्लैंड की असफलता को धोने की अच्छी कोशिश की। इंग्लैंड में शमी बेरंग नजर आये थे।
6. स्पिनरों ने आखिर जमाया अपना रंग
जैसा कि भारतीय स्पिनरों से उम्मीद थी उन्होंने कोटला में वैसा ही प्रदर्शन कर दिखाया। जडेजा ने किफायती गेंदबाजी करते हुये तीन विकेट चटकाटे तो अमित मिश्रा ने दो विकेट लेकर जडेजा का अच्छा हाथ बंटाया।
7. मैदान में दिखी टीम स्पिरिट
जब आप जीतते हैं तो उसमें टीम स्पिरिट का बड़ा हाथ होता है। जाहिर है टीम जीती है तो टीम स्पिरिट का भी इसमें योगदान रहा। जब कोई गेंदबाज लाइन या लैंग्थ से भटक रहा हो तो विकेट कीपर या नजदीकी फील्डर को उसे बताना होता है कि कहां गलती हो रही है। इससे गेंदबाज को अपनी रिद्म पाने में आसानी होती है।
ऐसे ही जब कोई बल्लेबाज गेंद खेलते समय कुछ गलती करता है तो नॉन स्ट्राइकर उसे बता सकता है कि कहां गलती हो रही है। इससे टीम स्पिरिट बढ़ती है, और खिलाड़ी एक दूसरे का खयाल रखते हैं। पहले मैच की हार ने टीम को एकजुट किया था। इसी का नतीजा टीम स्पिरिट के रूप में दिख रहा था।