भारत ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के तीसरे सीज़न का हिस्सा नहीं बनने के बाद पाकिस्तान के रवैय को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "पाकिस्तान को उन कारणों पर आत्मविश्लेषण करना चाहिए जिनकी वजह से भारत और पाकिस्तीन के रिश्तों में तनाव पैदा किया है और जिसने दोनों देशों के शांति, स्थिरता और समृद्धि को बुरी तरह से प्रभावित किया है."
गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ अतीत में किए अच्छे व्यवहारों का ज़िक्र किया गया है और कहा गया है कि आईपीएल-3 में भाग लेने लिए के भारत ने अल्प सूचना पर दिसंबर 2009 और जनवरी 2010 में 17 खिलाड़ियों को वीज़ा जारी किए हैं.
बयान में यह भी बताया गया है कि दो वीज़ा इस्लामाबाद से, तीन वीजा न्यूज़ीलैंड से और 12 वीज़ा ऑस्ट्रेलिया से जारी किए गए.
पिछले दिनों आईपीएल के तीसरे संस्करण की नीलामी में किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी के लिए किसी भी टीम प्रबंधन की ओर से कोई बोली नहीं लगाई गई थी. इस पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई थी.
पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने कहा था कि सरकार के स्तर पर ऐसा किया.
स्पष्टिकरण
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि आईपीएल के पहले सीज़न में पाकिस्तान के खिलाड़ी शामिल हुए थे जबकि 2009 के आईपीएल में शामिल नहीं हुए थे. साथ ही अक्तूबर 2009 में हुए टी-20 चैंपियन्स लीग में पाकिस्तान का एक खिलाड़ी शामिल हुआ था.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आईपीएल जैसा व्यवसायिक आयोजन में भारत सरकार के दायरे में नहीं आता.
इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने इस मुद्दे पर कहा था कि पाकिस्तान सरकार को सरकारी कार्यक्रमों और निजी प्रतियोगिताओं में अंतर करना चाहिए.
पाकिस्तान के आरोपों पर विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा, "सरकार का न तो आईपीएल से, न खिलाड़ियों के चयन से और न ही उनके अन्य कई क़दमों के कोई लेना-देना है."
आईपीएल में किसी भी पाकिस्तान खिलाड़ी के न बिकने के बाद पाकिस्तान ने एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल भारत न भेजने का फ़ैसला किया है.