
दोनों कप्तानों के बीच तुलना बिल्कुल जायज है
इस शो में शिरकत करते हुए विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने कहा कि दोनों कप्तानों के बीच लगातार की जा रही तुलना जायज है क्योंकि एक कप्तान ने जहां टीम को बनाने का काम किया तो वहीं दूसरे ने भारतीय टीम को कई सारी ट्रॉफी जिताई हैं।
उन्होंने कहा,' दोनों कप्तान के बीच प्रतियोगिता जायज है। एक कप्तान ने जहां टीम को बिल्ड किया, तो दूसरे ने कई ट्रॉफी जिताई है। साल 2000 के बाद जब सौरव गांगुली कप्तान बनें, तो भारतीय टीम मुश्किल दौर से गुजर रही थी। वहां से उन्होंने एक नई भारतीय टीम खड़ी की और टीम इंडिया को विदेशों में जीतना सिखाया। ऐसा नहीं था कि हम पहले नहीं जीत रहे थे, लेकिन गांगुली की कप्तानी में हमने कुछ बड़े टेस्ट मैच जीते।'

किसी को यकीन नहीं था कि 2003 विश्व कप में फाइनल खेलेगा भारत
पार्थिव पटेल ने सौरव गांगुली की तारीफ करते हुए कहा कि साल 2003 में किसी को यकीन नहीं था कि भारतीय टीम विश्व कप फाइनल खेलेगी लेकिन दादा ने विश्वास जताया और हम फाइनल खेले।
उन्होंने कहा,'दादा ने टीम को एक नई दिशा भी दी है, आप 2003 वर्ल्ड कप को ही देख लीजिए, किसी ने उम्मीद नहीं की थी भारत फाइनल में पहुंचेगा. वो हमें अपने रूम में बुलाते थे और खिलाड़ियों के प्रति अपना विश्वास दिखाते थे। वो कहते थे कि वो हमारे साथ हैं और किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मैं जब ब्रिस्बेन में नई गेंद के खिलाफ खेल रहा था, उन्होंने शतक लगाया था। मैं जेसन गिलेस्पी के खिलाफ खेल रहा था और हर गेंद के बाद वो मेरे पास आते और मेरी बल्लेबाजी की तारीफ करते। ऐसा करने से काफी फर्क पड़ता है और वो यह मेरे साथ नहीं, बल्कि सभी खिलाड़ियों के साथ करते थे।'

अगर देना पड़ा वोट तो दादा को चुनुंगा
पार्थिव पटेल ने आगे कहा कि ऐसा नहीं है कि धोनी ने भारत के लिये कहीं से भी कम योगदान दिया है, हालांकि अगर वोट करना पड़ा तो मैं दादा को वोट करूंगा।
उन्होंने कहा,' वहीं, अगर आप एमएस धोनी के बारे में बात करते, तो उनकी कप्तानी में भारत ने कई ट्रॉफियां जीती हैं। वह इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने इतनी ज्यादा ट्रॉफियां जीती हैं, लेकिन अगर मुझे वोट देना हो तो मेरा वोट दादा के लिए होगा क्योंकि उन्होंने शून्य से टीम तैयार की।'


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