सचिन ने क्यों नहीं देखा था साल 2011 विश्वकप फाइनल का विनिंग स्ट्रोक?
नई दिल्ली।'भारत रत्न' सचिन तेंदुलकर ने कई दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ियों की उपस्थिति में अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' का विमोचन किया। क्रिकेट विशेषज्ञ हर्षा भोगले ने कार्यक्रम की मेजबानी की और मंच पर मौजूद दिग्गज खिलाड़ियों सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, वासु परांजपे के अलावा सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वी.वी. एस. लक्ष्मण और खुद तेंदुलकर के साथ उनके जीवन और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान पर बातचीत की।
इस किताब में सचिन ने अपने जीवन से जु़ड़े कई गहरे राजों को उजागर किया है। जिसमें से एक खास बात यह है कि सचिन ने अपने जीवन के सबसे अमूल्य टू्र्नामेंट विश्वकप 2011 के फाइनल के अंतिम रोमांचक क्षणों को लाइव नहीं देखा था क्योंकि वो भी और लोगों की तरह गेम देखने में नहीं बल्कि प्रार्थना करने में बिजी थे। सचिन ने बताया है उन अंतिम क्षणों में मेरे साथ क्या हो रहा था इसे बयां कर पाना असंभव है लेकिन मैंने अपनी किताब में उन पलों को लिखा है।
अपने किताब के बारे में बात करते हुए सचिन ने कहा कि यह पुस्तक मेरे लिए एक अलग तरह की पारी के समान है, जिस पर मैं पिछले तीन वर्षो से काम कर रहा था। अपने खेल की ही तरह मैंने इस पुस्तक में अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं का ईमानदारी के साथ वर्णन किया है। उम्मीद करता हूं पाठक इस पुस्तक का लुत्फ उठाएंगे।"
इस किताब का प्रकाशन हैचेट इंडिया ने किया है, किताब सचिन तेंदुलकर की है, इसलिए इस किताब को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई है। आपको जानकर हैरत होगी कि सचिन की इस आत्मकथा ने रिलीज के पहले ही दिन हार्डबैक पुस्तक की बिक्री के भारत में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पुस्तक की हार्डबैक प्रति की एक लाख प्रतियां रिलीज की गई हैं।
हार्डबैक के अलावा सचिन की इस आत्मकथा का ईबुक संस्करण गुरुवार को रिलीज होगा। पुस्तक का मराठी, हिंदी, गुजराती, मलयालम और बांग्ला जैसी विभिन्न भारतीय भाषाओं में आडियो संस्करण भी अगले वर्ष के शुरुआत में रिलीज हो जाएगा।
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