7 जून के आते ही सुनील गावस्कर क्यों बन जाते हैं खलनायक?
मुंबई। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर के बारे में जब भी बातें होती है तो लोगों का सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है लेकिन क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी के साथ भी कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से जब भी 7 जून आता है तो क्रिकेट प्रेमियों के दिल में वो दर्द ताजा हो जाता है जो कि उन्हें आज से करीब 41 साल पहले गावस्कर के कारण मिला था।
दरअसल बात 7 जून 1975 की है, जिस दिन पहली बार वनडे प्रारूप में विश्वकप की शुरूआत हुई थी। इस विश्वकप का पहला मैच भारत और इंग्लैंड के बीच हुआ था। इंग्लैंड इस महान आयोजन का मेजबान था। तब वनडे मैच 60 ओवरों का होता है था।
60 ओवरों में मात्र 36 रन
इस मैच में सुनील गावस्कर ने पूरे 60 ओवर तक बल्लेबाजी की लेकिन मात्र 36 रन बनाये, ऐसा कहा जाता है कि गावस्कर ने ये सबकुछ वनडे मैच का विरोध करने के लिए किया था। भारत यह मैच बुरी तरह से हार गया था। इंग्लैंड ने 60 ओवरों में 334 रन बनाये थे जबकि पूरी भारतीय टीम मात्र 134 रनों पर सिमट गई थी। इस बड़ी हार के खलनायक सुनील गावस्कर को माना गया था।
गावस्कर ने मानी थी अपनी गलती
अपनी आलोचनाओं से बुरी तरह से परेशान गावस्कर ने इस मैच के बाद बयान दिया था कि वो इसे अपने जीवन की सबसे खराब पारी मानते हैं क्योंकि वो आउट ऑफ फार्म थे, ना तो वो रन बना पा रहे थे और ना ही आउट हो पा रहे थे। गावस्कर जो लोगों के दिलों में उस समय धड़का करते थे, कुछ वक्त के लिए लोगों के निशाने पर आ गये थे।
टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक
हालांकि इसके बाद गावस्कर ने कभी भी अपने खेल प्रेमियों को निराश नहीं किया और इसके बाद की उनकी कई विस्फोट पारियों ने उन्हें लोगों के दिलों का राजा बना दिया और वो सुनील गावस्कर से सनी सर बन गये। आपको बता दें कि सुनील गावस्कर ऐसे पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने 3 बार किसी टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक जमाया था।
100 से भी अधिक कैच पकड़ने का रिकॉर्ड
यही नहीं गावस्कर ऐसे पहले भारतीय खिलाड़ी हैं जिनके नाम (विकेटकीपिंग को छोड़कर) 100 से भी अधिक कैच पकड़ने का रिकॉर्ड है। गावस्कर को भारतीय नागरिक सम्मान पद्मश्री और पद्मभूषण से नवाजा जा चुका है।
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