नई दिल्ली। अगर ये कहा जाए कि पाकिस्तानी कप्तान सरफराज अहमद इस समय सोशल मीडिया पर सबसे विवादित क्रिकेटर हैं तो अतिश्योक्ति नहीं कही जाएगी। दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर एंडिल फेलुक्वायो को 'काला' कहकर बुरी तरह से फंसा यह खिलाड़ी अब हर तरह से माफी मांगकर मामले को किसी तरह सुलटाने में लगा हुआ है। इस मामले पर पहले ही सार्वजनिक तौर पर माफी मांग चुके सरफराज ने एक बार फिर से माफी मांगी है। लेकिन इस बार अंदाज और असर दोनों अलग है। इस बार सरफराज ने खुद ही व्यक्तिगत रूप से दक्षिणी अफ्रीकी ऑलराउंडर से मुलाकात करने का फैसला किया और फेलुक्वायो की अपने साथ हाथ मिलाते हुए एक फोटो ट्वीटर पर पोस्ट की है।
इस फोटो के साथ उन्होंने लिखा- 'इस सुबह मैंने एंडिल फेलुक्वायो से माफी मांगी और उन्होंने मेरी माफी स्वीकार कर ली। मैं उम्मीद करता हूं कि दक्षिण अफ्रीका के लोग भी मेरी माफी को स्वीकार करेंगे।' बता दें कि सरफराज पर बैन की भी तलवार लटक रही है। आईसीसी के द्वारा उनको चार से आठ तक सस्पेंशन अंक दिए जा सकते हैं जिसका मतलब होगा की उन पर चार एक दिनी या टी20 मैचों या फिर दो टेस्ट मैचों का बैन लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि सरफराज ने यह शर्मनाक शब्द तब बोले तो जब दक्षिण अफ्रीका की पारी का 37वां ओवर चल रहा था। तेज गेंदबाज शाहिन आफरीदी यह ओवर डाल रहे थे। ओवर की तीसरी गेंद पर फिलक्वायो के रन लेते के दौरान ही सरफराज ने यह बात बोली।
This morning I apologised to Andile Phehlukwayo and he was gracious enough to accept my apology .and I hope the people of South Africa also accept my apology. pic.twitter.com/bco00dGumR
— Sarfaraz Ahmed (@SarfarazA_54) January 25, 2019
सरफराज को यह कहते हुए सुना गया- 'अबे काले! तेरी अम्मी आज कहां बैठी हुई है? क्या परवा के आया है आज?' इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर सुर्खियों में छा गया था। इस मामले के बाद पीसीबी ने भी कड़ा रूख अपनाते हुए कहा था- 'सरफराज दुनिया के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में से एक हैं। पाकिस्तान की कप्तानी करना एक बहुत बड़ा सम्मान है और अगर कोई खिलाड़ी इस तरह की आपत्तिजनक बातें कहता है तो वह स्वीकार्य नहीं है चाहे वो कप्तान ही क्यों ना हो।' इस मामले के पकड़ में आते ही सरफराज ने पहले भी एक माफी मांग ली थी। तब उन्होंने कहा, 'मेरे शब्द किसी खास इंसान के लिए नहीं थे और मेरी किसी को ठेस पहुंचाने की भी कोई मंशा नहीं थी। यहां तक भी मैंने किसी को सुनाने के लिए भी यह बात नहीं बोली थी।'