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बगावत पर उतरा सौराष्ट्र क्रिकेट संघ, COA का आदेश मानने से किया इंकार, जानें क्या है मामला

नई दिल्ली। मोहाली में भारतीय टीम ने भले ही जीत का परचम लहराकर क्रिकेट में अपने देश कि स्थिति को मजबूत दिखाया हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त की गई प्रशासकों की समित (सीओए) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के राज्य संघों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। राज्य संघ चुनावों को लेकर बीसीसीआई ने अब सौराष्ट्र क्रिकेट संघ को नोटिस जारी किया है और 10 नए स्पष्टीकरण जारी किए। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति छह साल बोर्ड के पदाधिकारी और तीन साल बीसीसीआई की कार्यकारी समिति के रूप में कुल नौ साल बिता लेता है तो वह बीसीसीआइ का चुनाव लड़ने योग्य नहीं है।

इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति ने लगातार बीसीसीआई में पदाधिकारी के रूप में तीन साल और तीन साल किसी राज्य संघ की वर्किंग कमेटी के सदस्य के रूप में बिताए हैं तो उसे तीन साल के कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा यदि व्यक्ति ने नौ साल (पदाधिकारी और समिति सदस्य) राज्य संघ में पूरे किए हैं तो वह व्यक्ति राज्य संघ में पदाधिकारी और निदेशक के पद पर चुनाव लड़ने की श्रेणी में नहीं आता है।

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सीओए के इस फरमान के खिलाफ सौराष्ट्र क्रिकेट संघ ने बगावत कर दी है और पत्र लिखकर इन स्पष्टिकरणों को मानने से इंकार कर दिया है। सौराष्ट्र क्रिकेट संघ (एससीए) ने चुनाव अधिकारी वारेश सिन्हा को एक पत्र लिख पर साफ तौर पर कह दिया है कि वह प्रशासकों की समिति (सीओए) की ओर से सोमवार को भेजे गए निर्देशों का पालन नहीं कर सकता।

एससीए के संयुक्त सचिव मधुकर वोराह ने अपने पत्र में कहा है कि सीओए के पुराने आदेश के मुताबिक संघ में चुनाव प्रक्रिया 11 सितम्बर से शुरू हो चुकी है और वह सीओए द्वारा सोमवार को भेजे गए आदेश का पालन नहीं कर सकता।

पत्र में लिखा गया है, '11 सितम्बर को सीओए द्वारा भेजे गए नोटिस के मुताबिक हमने हमारी चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी है और यह नोटिस भी 27 अगस्त और छह सितम्बर के आदेश के आधार पर था। इसलिए हमारे लिए मुमकिन नहीं हो पाएगा कि हम सीओए के 16 सितम्बर के आदेश को लागू कर पाएं। हम अपनी चुनावी प्रक्रिया 11 सितम्बर के आदेश के मुताबिक ही करेंगे।'

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एससीए के इस बात से इत्तेफाक रखते हुए पश्चिम के ही एक अन्य संघ के अधिकारी ने कहा कि सोमवार को जो आदेश जारी किए हैं, उनकी कतई कोई जरूरत नहीं है और वे सर्वोच्च अदालत के आदेश के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा, '16 सितम्बर को जो नोटिस जारी किया गया उसके मुताबिक क्लब/विश्वविद्यालय/जिला संघ और सहयोगी संगठन ऐसे शख्स को संघ की चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए नामित नहीं कर सकते जो अधिकारी बनने के अयोग्य हो।'

अधिकारी ने कहा, 'सीओए ने कहा कि जो नोटिस उसने जारी किया है वो उसने बीसीसीआई के नियम सात के मुताबिक चुनाव अधिकारी से सलाह के बाद किया जबकि यह साफ है कि उस तरह की स्थिति की सिफारिश लोढ़ा समिति ने नहीं की थी और न ही इस बात का जिक्र सर्वोच्च अदालत के किसी भी आदेश में है।'

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गौरतलब है कि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सीओए जानबूझकर अड़चन पैदा कर रहा है ताकि बीसीसीआई से संघ चुनाव में और देरी की जा सके।

Story first published: Thursday, September 19, 2019, 13:13 [IST]
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