शरद पवार और अन्य को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री शरद पवार और अन्य पाँच लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला शुरू करने पर रोक लगा दी है.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने जगमोहन डालमिया की याचिका पर इन लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा दर्ज करने का निर्देश दिया था. इन लोगों पर ग़लत हलफ़नामा दायर करने का गंभीर आरोप लगाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शरद पवार और अन्य लोगों की याचिका पर यह निर्देश दिया है. इन लोगों ने अपनी याचिका में कहा था कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना फ़ैसला सुना दिया.
शरद पवार के अलावा इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगा है, वे हैं- बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष शशांक मनोहर, पूर्व सचिव निरंजन शाह, वरिष्ठ अधिकारी रत्नाकर शेट्टी, मौजूदा सचिव एन श्रीनिवासन और जूनियर क्रिकेट समिति के अध्यक्ष चिरायु अमीन.
मामला
कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह निर्देश पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के मामले में झूठा हलफ़नामा दायर करने के आरोप पर दिया था. डालमिया को वर्ष 2006 में बीसीसीआई से निलंबित कर दिया गया था.
डालमिया ने गंभीर आरोप लगाया था
उन पर आरोप लगाया गया था कि उनके कार्यकाल में हुए विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान वित्तीय अनियमितताएँ हुई थी. डालमिया ने बोर्ड के इस फ़ैसले को अदालत में चुनौती दी थी.
बाद में अदालत ने उनके निलंबन पर रोक लगा दी थी और इस साल हुए चुनाव में जगमोहन डालमिया फिर बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए.
कुछ महीने पहले डालमिया ने ग़लत हलफ़नामा दिए जाने को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.
इसके बाद ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने 12 नवंबर को दिए अपने आदेश में बोर्ड के छह अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला शुरू करने का आदेश दिया था.
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