ICC रैंकिंग में कभी 900 प्वाइंट के पार क्यों नहीं पहुंच सके सचिन तेंदुलकर, जानें कारण
नई दिल्ली। दुनिया भर में फैली महामारी कोरोना वायरस के बीच शुक्रवार को जारी हुई ताजा आईसीसी रैंकिंग में भारतीय टीम को बड़ा झटका लगा है। अक्टूबर 2016 से लगातार टेस्ट में नंबर 1 रही भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया ने पीछे छोड़ते हुए पहला नंबर हासिल कर लिया है, जबकि न्यूजीलैंड की टीम को भी एक स्थान का फायदा हुआ है। टेस्ट रैंकिंग में भारतीय टीम सीधा तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। वहीं टी20 रैंकिंग में भारतीय टीम को 1 स्थान का फायदा हुआ है और वो यहां भी तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। भारतीय टीम को आईसीसी रैंकिंग में जो नुकसान उठाना पड़ा है वह हाल ही में हुई न्यूजीलैंड सीरीज पर मिली करारी हार की बदौलत हुआ है।
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लगातार पूरा सत्र अच्छा खेलने के बाद भारतीय टीम को न्यूजीलैंड दौरे पर 2 मैचों की टेस्ट सीरीज क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा, जिसका नुकसान उसे आईसीसी रैंकिंग में भी उठाना पड़ा। कई सालों से दिग्गजों के बीच आईसीसी रैंकिंग के पैमाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उल्लेखनीय है कि आईसीसी के इस पैमाने का शिकार भारतीय टीम के महान बल्लेबाज और क्रिकेट में भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर को भी करना पड़ा।
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अपने करियर के दौरान कई बार आईसीसी की वनडे रैंकिंग में पहला स्थान हासिल करने वाले सचिन तेंदुलकर ने कभी भी 900 रेटिंग प्वाइंटस को हासिल नहीं किया। आइये एक नजर डालते हैं इसके कारणों पर:

लारा को पछाड़ पहली बार वनडे रैंकिंग में टॉप पर काबिज हुए थे सचिन तेंदुलकर
भारत के लिये महज 16 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले सचिन तेंदुलकर ने पहली बार 1994 में वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा को पछाड़ते हुए आईसीसी रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया था, हालांकि वह इस पोजिशन में महज 3 महीने ही कायम रह सके थे। साल 1998 में सचिन तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में नाबाद 155 रनों की पारी खेली और एक बार फिर से पहले स्थान को हासिल किया। वह उस साल ज्यादातर समय तक पहले स्थान पर कायम रहे जब तक स्टीव वॉ और ब्रायन लारा ने उन्हें नीचे धकेल कर फिर से टॉप पोजिशन हासिल नहीं कर ली।
मई 2000 में सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर से आईसीसी रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया और लगभग एक साल तक अपने स्थान को बरकरार रखा।

2002 में हासिल की करियर की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग
सचिन तेंदुलकर इस दौरान काफी अच्छी फॉर्म में नजर आये और लगातार पहले स्थान पर बने रहने और 2002 के शुरुआती महीनों में रनों के अंबार ने उन्हें अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग 898 प्वाइंटस पर पहुंचा दिया। वह इस पायदान पर सितंबर 2002 तक बने रहे और रैंकिंग में नीचे आ गये। आईसीसी रैंकिंग में एक बार फिर से टॉप पर पहुंचने के लिये सचिन तेंदुलकर को 8 साल का इंतजार करना पड़ा और 2010 में एक बार फिर वो टॉप पोजिशन पर पहुंचे। वह रैंकिंग में पहले स्थान पर 2011 के पहले 6 महीनों तक बरकरार रहे।

इस कारण सचिन कभी नहीं पहुंच पाये 900 रेटिंग प्वाइंट तक
अपने करियर के दौरान रनों का अंबार लगाने वाले सचिन तेंदुलकर यूं तो रनों के साथ काफी कंसिस्टेंट रहे लेकिन सचिन तेंदुलकर को बल्लेबाजी में वो फॉर्म कभी नहीं मिली जो रिकी पोंटिंग या विराट कोहली को मिली। इन खिलाड़ियों ने अपने करियर के दौरान कई मौकों पर लगातार रनों की बारिश करने का काम किया है जिसकी बदौलत वह 900 रेटिंग प्वाइंटस के मार्क को पार कर चुके हैं जबकि सचिन तेंदुलकर के साथ अक्सर देखने को मिला कि वह 3 मैचों में रन बनाते थे तो अगले 4 मैचों में जल्दी आउट हो जाते थे। इस कारण वह कभी भी 900 रेटिंग प्वाइंट को छू भी नहीं सके।
इसे आप ऐसे भी देख सकते हैं कि सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर के दौरान एक टेस्ट सीरीज में कभी भी 500 से ज्यादा रन नहीं बनाये। अपने करियर में 100 शतक लगाने वाले मास्टर ब्लास्टर ने कभी भी एक सीरीज में 3 या 4 शतक नहीं लगाये, जिसके चलते वह आईसीसी रैंकिंग में टॉप पर तो पहुंचे पर कभी भी 900 रेटिंग प्वाइंट को पार नहीं किया।

लारा के साथ हमेशा रही प्रतिद्वंदिता
सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर के दौरान 200 टेस्ट मैच खेले जबकि ब्रायन लारा ने 131 मैचों में ही शिरकत की। इस दौरान सचिन ने जहां 329 टेस्ट पारियां खेलकर 159921 रन बनाये तो वहीं पर ब्रायन लारा ने 232 पारियां खेलकर 11953 रन बनाये। इस दौरान मास्टर ब्लास्टर की औसत जहां पर 53.78 रही वहीं ब्रायन लारा ने 52.88 की औसत से रन बनाये।
टेस्ट करियर के दौरान सचिन तेंदुलकर ने 6.45 की औसत से 51 शतक लगाने का कारनामा किया तो यहां पर लारा ने मास्टर ब्लास्टर की तुलना में थोड़ा बेहतर साबित होते हुए 6.82 की औसत से 34 शतक ठोंके।
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