जानिए किन कारणों से मिताली-रमेश विवाद में 'हंसी का पात्र' बनकर रह गया सीओए
नई दिल्ली। बीसीसीआई के नियमित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासको की समिति यानी सीओए की व्यवस्था दी थी। इसकी कमान विनोद राय को दी गई तो माना गया कि अब बीसीसीआई में पारदर्शिता आएगी। लेकिन अब लगता है सीओए खुद अपने सदस्यों के बीच खींचतान में उलझ चुकी है। इस खींचतान को अगर महिला क्रिकेट में आए ताजा भूचाल से जोड़कर देखे तो तस्वीर साफ है कि सीओए के मुखिया विनोद राय और इसकी एक अन्य सदस्य डायना इडुलजी के बीच नजरिए का मतभेद साफ उभर आता है।

रमेश पवार और मिताली गुट का खेमा बना सीओए
बता दें कि मिताली राज ने जब महिला टीम के कोच रमेश पवार पर पक्षपात करने जैसे आरोप लगाए थे तो डायना इडुलजी का नाम भी उसमें पवार के साथ शामिल था। अब जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है तो डायना इडुलजी एक बार फिर से खुलकर रमेश पवार को सपोर्ट कर रही हैं, जबकी विनोद राय की राय रमेंश पवार को फिर लेने के पूरी तरह खिलाफ है।
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मिताली-रमेश विवाद में हंसी का पात्र बना सीओए
इस अंदरूनी खींचतान का असर अब बाहर मीडिया और अन्य जगहों पर भी साफ देखा जा सकता है। पूर्व भारतीय क्रिकेटरों की भी इस मामले पर नजरे हैं और दिलीप वेंगसरकर इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि बीसीसीआई का प्रशासन पूरी तरह उथल-पुथल हो चुका है। जिस तरह से सीओए मामलों को संभाल रहा है, उससे यह मजाक का पात्र बन गया है। इससे पहले गांगुली भी अक्टूबर में सीओए के कामकाज की आलोचना कर चुके हैं।
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'खिलाड़ी ना तय करे कौन कोच होगा कौन नहीं..'
वेंगसरकर ने कहा, 'किसको कोच बनाना है और किसको नहीं, यह प्रशासन को देखना चाहिए। किसी कप्तान के कहने या ना कहने के आधार पर कोच को रखा जाना या निकाला जाना गलत है। मैं ये नहीं समझ पा रहा हूं कि कोच जैसे मामलों में खिलाड़ियों का दखल कैसे आ गया है।' गौरतलब है कि बीसीसीआई ने जब महिला कोच की नियुक्ति के लिए नई एडहॉक समिति नियुक्त की थी तो डायना इडुलजी ने खुलासा किया था कि कैसे विराट कोहली ने कुंबले को हटवाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उसके बाद उन्होंने सवाल उठाया था कि जब विराट के कहने पर शास्त्री को लिया जा सकता है तो हरमनप्रीत के कहने पर रमेश पवार को क्यों नहीं लिया
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