For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts
 

1983 की वर्ल्ड चैंपियन टीम के मेंबर रहे, पर भारत से नहीं खेले

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। क्या सुनील वाल्सन को आप जानते हैं? उम्मीद है कि अगर नौजवान हैं तो आपने उनका नाम भी ना सुना हो। पर बता दें कि वे उस टीम इंडिया में थे,जो 1983 में वर्ल्ड कप क्रिकेट का फाइनल जीता था। और रोचक बात ये है कि वे विश्वकप विजेता टीम के सदस्य होने के बावजूद उस चैंपियनशिप में नहीं खेले। वाल्सन दिल्ली से खेलते थे। वे भारत के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज थे।

धोनी से उम्मीदें

वे कहते हैं कि इस विश्व कप में भारत के लिए महेन्द्र सिंह धोनी, विराट कोहली और मोहम्मद शमी अहम रहेंगे। वे दिल्ली में ही रहते हैं। सुनील वाल्सन का मानना है कि 2015 विश्व कप में शमी ही टीम की अहम कड़ी होंगे। वाल्सन ने कहा, 'उसने (शमी) भारत में वनडे में अच्छा प्रदर्शन किया है। थोड़ी दिक्कतें लाइन को लेकर जरूर हैं लेकिन ये अहम है कि कितनी जल्दी आप विकेट लेते हैं और विपक्षी टीम को दबाव में डालते हैं। शमी टीम के सबसे प्रमुख और शीर्ष गेंदबाज साबित होंगे। उन्हें अब जिम्मेदारी लेनी होगी और वो अब सीनियर गेंदबाजों में से भी एक हैं।

क्रिकेट विश्वकप 2015 का विशेष कवरेज

उनके जेहन में 1983 के विश्व कप की यादें ताजा हैं। उस टीम में कपिल देव, रोजर बिन्नी, मदनलाल और बलविंदर सिंह संधू जैसे मध्यम तेज गेंदबाज थे और मोहिन्दर अमरनाथ भी धीमी मध्यम तेज गेंदबाजी किया करते थे। इन गेंदबाजों की उपस्थिति में वाल्सन के लिए टीम में वैसे ही कोई जगह नहीं थी।

अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला

वाल्सन बेशक विश्वकप में कोई मैच नहीं खेल पाए लेकिन उन्हें कम से कम एकाध अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका तो मिल ही सकता था जो उन्हें कभी नहीं मिल पाया। भारत की विश्वकप जीत के 25 वर्ष पूरे होने पर जून 2008 में विश्वकप विजेता टीम के लिए एक स्वागत समारोह हुआ था जिसमें टीम के सभी सदस्य मौजूद थे। विश्वकप जीतने वाली टीम के कप्तान कपिलदेव ने इस समारोह में हर खिलाड़ी के लिए कुछ न कुछ कहा था और जब बारी सुनील वाल्सन की आई तो कपिल ने कहा कि मुझे उनके लिए गहरा अफसोस है।

आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में जन्मे बाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज वाल्सन अपने प्रथम श्रेणी करियर में दिल्ली और रेलवे की तरफ से खेले थे। उन्होंने 75 प्रथम श्रेणी मैचों में 212 विकेट लिए थे। उनका प्रथम श्रेणी करियर 1977 से लेकर 1988 तक चला था।

देश की नुमाइंदगी

खैर यह आज भी एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है कि एक खिलाड़ी विश्वकप विजेता टीम का सदस्य रहा लेकिन उसे अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका कभी नहीं दिया गया। सुनील वाल्सन कहते हैं कि उन्होंने मैदान में जो कुछ पाया उससे वे संतुष्ट हैं। अब वे चाहते हैं कि टीम इंडिया फिर से विश्व कप जीत ले।

Story first published: Monday, November 13, 2017, 11:12 [IST]
Other articles published on Nov 13, 2017
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+