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दो गोलियां हो गईं थी आर-पार, आतंकी हमले को याद कर आज भी कांप उठता है ये अंपायर

श्रीलंका क्रिकेट टीम की बस पर हुए आतंकी हमले को 10 साल हो गए हैं। यह हमला 3 मार्च 2003 को पाकिस्तान के खिलाफ गद्दाफी स्टेडियम में हुए दूसरे टेस्ट मैच के दाैरान हुआ था। हमला इतना भयानक था कि कुछ समय...

नई दिल्ली। श्रीलंका क्रिकेट टीम की बस पर हुए आतंकी हमले को 10 साल हो गए हैं। यह हमला 3 मार्च 2003 को पाकिस्तान के खिलाफ गद्दाफी स्टेडियम में हुए दूसरे टेस्ट मैच के दाैरान हुआ था। हमला इतना भयानक था कि कुछ समय के लिए श्रीलंकाई खिलाड़ी भी समझ नहीं सके कि आखिर हुआ क्या। हमले के बाद श्रीलंका सरकार ने तुरंत अपनी क्रिकेट टीम का पाकिस्तान दौरा रद्द कर टीम को वापस बुला लिया। श्रीलंकाई प्लेयर्स को जैसे-तैसे बचाकर स्टेडियम से एयरलिफ्ट कर एयरपोर्ट पहुंचाया गया। क्रिकेट इतिहास के लिए यह कभी ना भूला पाने वाला दिन है जिसे आज भी अंपायर अहसान रजा याद करते हुए कांप उठते हैं।

दो गोलियां हो गईं थी आर-पार

दो गोलियां हो गईं थी आर-पार

राजा को इस टेस्ट में रिजर्व अंपायर की भूमिका निभाने के लिए अन्य मैच अधिकारियों के साथ गद्दाफी स्टेडियम जा रहे थे जब उनसे कुछ गज आगे चल रही टीम बस पर 12 आतंकियों ने हमला कर दिया जिसमें 8 पुलिसकर्मी और स्थानीय नागरिक मारे गए और 6 अन्य घायल हुए। दो गोलियां रजा के यकृत और फेफड़ों के आर-पार निकल गईं और कोमा से बाहर आने के बाद रजा को दोबारा अपने कदमों पर चलने में छह महीने लग गए। रजा ने कहा, 'मेरे जख्म भर गए हैं लेकिन मैं जब भी इन्हें देखता हूं तो मुझे वह नृशंस घटना याद आ जाती है।' उन्होंने कहा, 'जब भी कोई उस घटना का जिक्र करता है तो मैं उससे आग्रह करता हूं कि मुझे उस त्रासदी की याद नहीं दिलाए।'

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भारत ने रद्द किया था दाैरान

भारत ने रद्द किया था दाैरान

इस हमले के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को काफी नुकसान भी ढेलना पड़ा। अन्य टीमों ने पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने के लिए साफ इंकार कर दिया। 2009 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीरीज खेली जानी थी, लेकिन 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया था। वहीं पाकिस्तान पर आतंक को पनाह देने की बात उठने लगी, जिसके डर के मारे वहां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए कई देशों ने साफ-साफ मना कर दिया। पाकिस्तान हालांकि प्रत्येक साल अधिक मैच अपने देश में कराने का प्रयास कर रहा है। श्रीलंका टीम पर हमले के 6 साल बाद 2015 में पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे के रूप में पहली बार अंतरराष्ट्रीय टीम की मेजबानी की। गद्दाफी स्टेडियम में कड़ी सुरक्षा के बीच मार्च 2017 में पीएसएल फाइनल खेला गया।

यूं हुआ था हमला

यूं हुआ था हमला

बता दें कि पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका टीम ने पहली पारी में 606 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 1 विकेट के नुकसानपर 110 रन बना लिए थे। तीसरे दिन का खेल शुरू करने के लिए श्रीलंकाई खिलाड़ी होटल से बस में बैठकर गद्दाफी स्टेडियम जा रहे थे कि तभी आतंकियों ने बस अंधाधुंध गोलिया बरसाना शुरू कर दीं। पुलिस बल ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खिलाड़ियों को उस जगह से निकाला। इस बीच आतंकियों ने बस पर लाॅन्चर भी फेंका पर निशाना चूक गया। इस हमले में महेला जयवर्धने, उपकप्तान कुमार संगाकारा समेत 6 खिलाड़ी चोटिल हो गए थे।

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Story first published: Wednesday, March 13, 2019, 10:17 [IST]
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