लखनऊ। तकरीबन एक दशक तक भारतीय क्रिकेट में अहम योगदान देने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है। सन्यास के बाद सहवाग ने अपने सन्यास के बारे में अहम अनुभव साझा किया है। वीरेंद्र सहवाग ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह अपने कैरियर के शीर्ष पर रहते हुए 2007 में सन्यास लेना चाहते थे। लेकिन सचिन तेंदुलकर ने उन्हें सन्यास लेने से मना कर दिया था।
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सहवाग ने कहा कि कि जब उन्हें टीम से बाहर किया गया था तो उन्होंने सन्यास लेने का फैसला ले लिया था। उन्होंने कहा कि अगर मै शीर्ष पर रहते हुए सन्यास लेता तो शायद मुझे भी विदायी भाषण देने का मौका मिल जाता। आपको बता दें कि 20 अक्तूबर 2015 को अपने 37वें जन्मदिन के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया। सहवााग तकरीबन ढाई साल से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से दूर थे।
सहवाग ने अपना आखिरी टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मार्च 2013 में खेला था। इस मैच के बाद सहवाग की टीम में वापसी नहीं हुई। हालांकि सहवाग को इस बात का मलाल है कि चयनकर्ताओं ने उन्हें पर्याप्त मौके नहीं दिये। माना जा रहा है कि फिरोज शाह कोटला मैदान पर सहवाग को विदायी भाषण देने का मौका मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टेस्ट में उन्हें औपचारिक विदायी दी जा सकती है।