
गावस्कर-श्रीकांत के चलते सहवाग ने ठोंका दोहरा-तिहरा शतक
उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र सहवाग वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के शो आप की अदालत में पहुंचे थे जहां पर उन्होंने क्रिकेट में दोहरे और तिहरे शतक लगा पाने का श्रेय सुनील गावस्कर और कृष्णामचारी श्रीकांत को दिया।
सहवाग ने बताया, 'श्रीकांत-गावस्कर कहा कि आप लेग स्टम्प के बाहर खड़े होते हैं और बॉल से बहुत दूर हो जाते हैं। इसलिए कई बार आप ऑफ स्टम्प के बाहर की गेंदों पर आउट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप मिडिल ऑफ पर खड़े होइए। आप बॉल के और पास आएंगे तो और ज्यादा रन बना पाएंगे। फिर मैंने वैसा ही करना शुरू किया। तो उसके बाद मैंने बहुत सारे लंबे 150, 200 और मेरे ख्याल से 6 डबल हंड्रेड (इनमें दोनों तिहरे शतक शामिल हैं) और दो ट्रिपल सेंचुरी बनाईं। यह एक अच्छी राय थी जो मुझे श्रीकांतजी और सुनील गावस्कर जी से मिली।'

लोगों का काम है सलाह देना, मानना आप पर निर्भर है
इस शो के दौरान एंकर रजत शर्मा ने सहवाग पर आरोप लगाया कि क्रिकेट विशेषज्ञों ने उन्हें हमेशा अपनी बल्लेबाजी स्टाइल को ठीक करने की सलाह दी, कुछ गेंदों को छोड़ने की बात कही लेकिन सहवाग ने हमेशा उनकी बातों को अनसुना किया। इस पर बात करते हुए कहा कि मेरा मानना है कि लोगों का काम है सलाह देना यह आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सी मानना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा,'यह तो बेकार की जिद वाली बात हो गई। वे तो बेकार की बातें थीं। मेरा ऐसा मानना है कि अगर मैं क्रिकेट खेलता हूं और मैं जिस गेम को खेलता हूं और जिससे मुझे सक्सेस मिली है तो वह मुझसे बेहतर और कौन जान सकता है। लोग अपनी सलाहें देते हैं, राय देते हैं, लेकिन अच्छा खिलाड़ी वही होता है जो उन रायों में से एक राय उठाता है और अपनी बैटिंग में इम्पलीमेंट करता है और उससे उसे और आगे सक्सेस मिलती है। मुझे बहुत सी रायें मिलीं। लेकिन जो मुझे सबसे अच्छी राय लगी वह श्रीकांत और सुनील गावस्कर की थी।'

करियर में जिद्दी होना अच्छा रहा
वहीं रजत शर्मा ने इसी शो में वीरेंद्र सहवाग को टीम इंडिया का सबसे जिद्दी खिलाड़ी होने का आरोप लगाया जिस पर सहवाग ने अपने हाजिरजवाब अंदाज में कहा कि उनका जिद्दी होना करियर के लिये काफी अच्छा रहा।
उन्होंने कहा, 'जिद अगर अच्छी हो तो क्यों नहीं करनी चाहिए। जिद अगर यह है कि आप अपने देश के लिए खेलना चाहते हैं तो ऐसी जिद क्यों नहीं करनी चाहिए। जिद हो कि बॉलरों की पिटाई करनी है तो यह जिद अच्छी है। लेकिन अगर खराब जिद है तो वह गलत है।'


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