लखनऊ। वीरेंद्र सहवाग को टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज के तौर पर जाना जाता है। अपने विस्फोटक अंदाज के बारे में सहवाग ने एक साक्षात्कार में खुलकर बात की। सहवाग ने एक साक्षात्कार मे कहा कि उनके क्रिकेटिंग कैरियर में उपलब्धियों की एक सबसे बड़ी वजह सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर हैं।
सहवाग ने साझा किये जीवन के 5 दिलचस्प अनुभव
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सहवाग की शुरुआत बेहद खराब हुई। पहले मैच में उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 1999 में मोहाली मे सिर्फ 1 रन बनाये और तीन ओवर में 35 रन लुटाये। इस मैच में सहवाग सिर्फ 1 रन बनाकर शोएब अख्तर की गेंद पर आउट हो गये। इस मैच के बाद जब सहवाग बस में अकेले बैठे थे तो सौरव गांगुली उनके पास आये और बोले अगर टीम में नहीं लिया जाता है तो इतना रन बनाना कि वापस टीम में आये।
सहवाग ने बताया कि गांगुली की इस बात ने मुझे काफी प्रभावित किया और इसके बाद सहवगा ने दिल्ली टीम के लिए 757 रन बनाकर वापस टीम में अपनी वापसी की। इसके बाद टीम इंडिया में वापसी के बाद 2001 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहली पारी में सैकड़ा जमाया। उन्होंने बताया कि इस पारी के दौरान सचिन ने उन्हें बताया कि कैसे अफ्रीकी गेंदबाज उन्हें आउट करने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने बताया कि अफ्रीकी गेंदबाज उन्हें बाउंस पर आउट करने की कोशिश करेंगे। वहीं जब सचिन ने सहवाग से पूछा कि क्या पेट में गुदगुदी हो रही है तो उन्होंने कहा कि वो सब छोड़िये सर यह बताइये कि पिच पर क्या हो रहा है। वहीं मुल्तान में जब वह मैं खेल रहा थे तो उस दौरान मैं लगातार 4 छक्के लगा चुका था।
तभी तेंदुलकर मेरे पास आये और बोले अगर तूने फिर छक्का मारा तो मैं तुझे बैट से मारूंगा। लेकिन जब मैं 295 रन पर पहुंचा तो मैंने सचिन से कहा कि अगर सकलैन मुश्ताक गेंदबाजी करने आया तो वह छक्का मारेंगे। बहरहाल इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। सहवाग ने कहा कि मेरी बल्लेबाजी के पीछ सचिन और गांगुली की बड़ी भूमिका है।