हर बार बलि का बकरा नहीं बन सकता :गांगुली

By Staff
{image-sourav+ganguly_09102008.jpg hindi.mykhel.com}कोलकाता, 9 अक्तूबरः दिलीप वेंगसरकर की अध्यक्षता वाली पूर्व चयन समिति को आड़े हाथों लेते हुए सौरव गांगुली ने कहा है कि उन्हें हर बार बलि का बकरा बनाया गया जबकि दूसरों को बख्शा जाता रहा और उन्होंने आगे शर्मिंदगी से बचने के लिये संन्यास का फैसला लिया।

इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का फैसला लेने वाले गांगुली ने कहा इस तरह खेलने का कोई फायदा नहीं है। मैं चयनकर्ताओं की दया पर खेलने के लिये तैयार नहीं हूं। वे आज आपको चुनेंगे और कल बाहर कर देंगे। मैं हर बार बलि का बकरा क्यों बनूं। यह स्वीकार करना मुश्किल है।

उन्होंने बांग्ला दैनिक आजकल को दिये इंटरव्यू में कहा यदि आपके सिर पर तलवार लटक रही हो तो आप कितना बर्दाश्त कर सकते हैं। वह भी 450 मैच खेलने के बाद। मैने सिर्फ एक श्रृंखला में खराब खेला लेकिन दूसरों को बाहर नहीं किया गया।

मैने वापसी के बाद सबसे ज्यादा रन बनाये हैं। गांगुली ने कहा मैं और कितना खेलता। शायद 2009 तक। शायद सात और टेस्ट। इसके लिये मैं और अपमान झेलने को तैयार नहीं था।

गांगुली ने कहा कि वेंगसरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा उन्हें ईरानी कप के लिये शेष भारत की टीम से बाहर किया जाना ताबूत में आखिरी कील थी और उन्हें लगा कि अब बेइज्जती की इन्तहां हो गई।

उन्होंने कहा मैने कभी नहीं सोचा था कि मैं ईरानी टीम से बाहर हो जाऊंगा। मैं गुस्से के कारण एक महीने तक सो नहीं सका। यदि नई चयन समिति तीन साल पहले आई होती तो हालात दीगर होते।

Story first published: Thursday, October 9, 2008, 15:47 [IST]
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