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वेस्टइंडीज की दुर्गति के जिम्मेदार बड़े खिलाड़ियों को हूपर ने सुनाई खरी खोटी

west indies skipper carl hooper upset with the senior west indian player attitude towards the national team.

नयी दिल्ली। छोटे छोटे द्वीपों में बंटा वेस्टइंडीज एक समय अपने खूंखार तेज गेंदबाजों और जांबाज बल्लेबाजों के लिए पूरे विश्व क्रिकेट का बेताज बादशाह था। 70 और 80 के दशक का वह दौर कोई क्रिकेट प्रेमी भूलना नहीं चाहेगा। यह वो समय था जब पूरे वेस्टइंडीज का क्रिकेट के क्षेत्र में सिर फक्र से ऊंचा था।

समय के साथ क्रिकेट में आया बदलाव

समय के साथ क्रिकेट में आया बदलाव

हालांकि समय के साथ जैसे जैसे क्रिकेट में बदलाव होते गए और बाजार खेल पर हावी होता गया वैसे वेसै ही विडींज क्रिकेट की दशा भी खराब होती गई। सबसे पहले यहां का टेस्ट क्रिकेट प्रभावित हुआ और बाद में तो 50-50 और टी-20 क्रिकेट तक भी हाल खराब होने लगा।

राष्ट्रीय टीम में मौजूद नहीं है बेहतर खिलाड़ी

राष्ट्रीय टीम में मौजूद नहीं है बेहतर खिलाड़ी

इसका सबसे बड़ा कारण बड़े खिलाड़ियों का देश की क्रिकेट को तवज्जो देने के बजाए दुनिया भर में चल रही टी-20 क्रिकेट को समय देना रहा। वैसे इस दौरान चयनकर्ताओं ने भी अपनी चयन नीतियों से भी इस मामले को और खराब ही किया। इसलिए आज के दौर में भी कई बेहतर खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद कैरेबियाई क्रिकेट की दुर्गति बढ़ती गई।

खेल से बड़े नाम है गायब

खेल से बड़े नाम है गायब

विंडीज क्रिकेट की पतली हालत पर चर्चा करते हुए टीम के पूर्व कप्तान कार्ल हूपर ने बात करते हुए कहा की यह बड़े शर्म की बात है कि आज के वेस्टइंडियन क्रिकेटर अपने देश के लिए खेलने में दिलचस्पी नहीं रखते। बता दें कि वर्तमान में भारत में जारी टी-20 मैचों की सीरीज में वेस्टइंडीज की टीम क्रिस गेल, आंद्रे रसेल, सुनील नरेल आदि जैसे बड़े नामों के बिना खेल रही है। वेस्टइंडीज को पहले मैच में 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था और आगे के मैचों में भी उसकी डगर मुश्किल ही नजर आ रही है।

'खिलाडि़यों का ना खेलना शर्मनाक'

'खिलाडि़यों का ना खेलना शर्मनाक'

क्रिकेटर से कमेंटेटर बने हूपर ने कहा, "किसी को चोट लगी है तो किसी को व्यक्तिगत समस्या है। साफ है कि ये खिलाड़ी अपने देश के लिए खेलने में अब ज्यादा दिलचस्प नहीं रहे हैं। यह शर्म की बात है।" गौरतलब है विंडीज टीम पहले टी-20 में केवल 109 रनों पर सिमट गई थी।

ऐसे में हूपर का मानना है कि अगर हमारे सीनियर खिलाड़ी टीम में खेल रहे होते तो भारत के लिए जीतना कभी इतना आसान नहीं होता जितना की अब हो रहा है। ये सभी सीनियर बड़े खिलाड़ी है और किसी भी दिन अपनी परफार्मेंस के दम पर खेल को पलटने का माद्दा रखते हैं। विभिन्न देशों की टी-20 लीग में छक्के मारमारकर विपक्षियों के छक्के छुड़ाने वाले क्रिस गेल अगर अपनी राष्ट्रीय टीम के लिए उपलब्ध नहीं हैं तो ऐसे में हूपर की टीस समझी जा सकती है। हूपर ने बाद में कहा कि यह एक युवा टीम है जिसको समय चाहिए।

बेहद खराब रहा है वेस्टइंडीज का प्रदर्शन

बेहद खराब रहा है वेस्टइंडीज का प्रदर्शन

उल्लेखनीय है कि विंडीज की हालत इस पूरे साल ही पतली रही है। अब तक खेल गए 8 मैचों में यह टीम केवल 2 मैच ही जीत पाई है। 102 टेस्ट मैच खेलने वाले हूपर ने आगे कहा, " कई बार हम बेहतर खेलते हैं और कई बार बहुत खराब। हममें प्रतिभा है लेकिन उसको निखारने की जरूरत है। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को भी अपनी नीतियों में सुधार करने की जरूरत है।

Story first published: Tuesday, November 6, 2018, 18:22 [IST]
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