
क्या है बलिदान बैज?
इस बैज में 'बलिदान' शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है। यह बैज चांदी की धातु से बना होता है, जिसमें ऊपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है। यह बैज केवल पैरा-कमांडो द्वारा पहना जाता है। भारतीय सेना की एक स्पेशल फोर्सेज की टीम होती है जो आतंकियों से लड़ने और आतंकियों के इलाके में घुसकर उन्हें मारने में दक्ष होती है। मुश्किल ट्रेनिंग और पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाके में घुसकर दुश्मन को मारने में महारत हासिल करने वाले इन सैनिकों को पैरा कमांडो कहा जाता है।
पैरा कमांडो करते हैं इसका इस्तेमाल
‘बलिदान बैज' के चिह्न का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकता। इसे सिर्फ पैरा कमांडो ही लगाते हैं। पैरा स्पेशल फोर्स को आमतौर पर पैरा एसएफ कहा जाता है। यह भारतीय सेना की स्पेशल ऑपरेशन यूनिट होती है। पैरा स्पेशल फोर्स ने ही 2016 में पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।
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धोनी के ग्लव्स पर क्यों?
धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से नवाजा गया था। उसके बाद साल 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया और उन्हें ये बैज लगाने की अनुमति दी गई। आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान से पांचवीं छलांग पूरी की थी। तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद गए थे और एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक उतरे थे। इसके बाद धोनी को इस बैज का इस्तेमाल करने की अनुमति प्राप्त हुई। धोनी कभी भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

ICC ने इसलिए किया विरोध
धोनी के ग्वल्व पर बने बैज की आलोचना भी होने लगी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद(आईसीसी) ने भी बीसीसीआई को आदेश दे दिया कि धोनी इन ग्लव्स का मैच के दाैरान इस्तेमाल ना करें। हालांकि इस पर सोशल मीडिया पर धोनी कहा जा रहा है कि धोनी ने 'बैज' का इस्तेमाल करके कोई गलती नहीं है बल्कि सेना को सम्मान दिया है, लेकिन आईसीसी की सोच और नियम अलग हैं। आईसीसी के नियम के मुताबिक, 'आईसीसी के कपड़ों या अन्य चीजों पर अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान राजनीति, धर्म या नस्लभेदी जैसी चीजों का संदेश नहीं होना चाहिए।'
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क्या कहना है मेजर बक्शी का
मेजर जनरल गगनदीप बक्शी भारतीय सेना के एक सेवानिवृत अधिकारी एवं लेखक हैं। वे 'जी डी बक्शी' नाम से प्रसिद्ध हैं। वे जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स में थे। उन्हे कारगिल युद्ध में एक बटालियन का नायकत्व (कमांड) करने के लिए विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। उनका धोनी के 'बैज' पहनने पर कहा, ''धोनी इसे ग्लव्स से नहीं हटाएं नहीं तो ग्लव्स बंद हो जाएंगे। धोनी नागरिक नहीं है बल्कि प्रादेशिक सेना-पैराशूट रेजिमेंट में कर्नल है। जैसे कि हम गर्व के साथ उस बलिदान बैज को पहनने के लिए उसे सलाम करते हैं। यह एक वाणिज्यिक LOGO नहीं है। इतने अधिकारियों, जेसीओ और पुरुषों ने बलिदान के बलिदानी बैज पहनने का सम्मान प्राप्त करने के लिए अपना जीवन लगा दिया। सशस्त्र बल ऐसा किसी भी कंट्रोवर्सी में शामिल नहीं होना चाहते। हम सभी देखभाल के लिए शापित नियमों को बदल दें, लेकिन 'बलिदान बैज' को कमजोर नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा रिटायर्ड मेजर गाैरव आर्य ने भी धोनी को स्पोर्ट करते हुए कहा, ''आप पैरा रेजेट के एक अधिकारी हैं। उन दस्ताने को मत उतारो। बालिदान सम्मान का 'बैज' है। यह भारतीय सेना के बेहतरीन प्रदर्शन का प्रतिनिधित्व करता है। मैंने हमेशा विस्मय और सम्मान के साथ उस 'बैज' को देखा है। राष्ट्र आपके साथ खड़ा है।''


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