'आखिरी सांस तक क्रिकेट से रहेगा प्यार', संन्यास के बाद भावुक युवराज ने क्या कहा

yuvraj singh

नई दिल्ली : क्रिकेट में अगर कोई Fairy Tale होती है तो उस शख्स का नाम है युवराज सिंह। इस शख्स का नाम क्रिकेट की एक ऐसी कहानी है जिसे पूरी दुनिया में इज्जत और सम्मान की नजर से देखा जाता है। टीम इंडिया को 2007 में टी-20 विश्व कप जिताने और साल 2011 के विश्व कप के REAL HERO ने आखिरकार क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 25 साल की क्रिकेट जर्नी और 19 साल तक क्रिकेट खेलने के बाद जब युवराज अपने संन्यास की घोषणा की तब उनकी आंखें नम और आवाज बार बार चॉक कर रही थी। क्रिकेट को अलविदा कहते वक्त वो कई बार भावुक दिखे लेकिन किसी तरह अपने जज्बात पर काबू रखते हुए उन्होंने 22 गज की पिच को अलविदा कह दिया। मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास ले रहे हैं लेकिन प्रोफेशनल क्रिकेट खेलते रहेंगे, जानिए भारतीय क्रिकेट के असली हीरो ने क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद क्या-क्या कहा।

आखिरी सांस तक क्रिकेट से रहेगा प्यार

आखिरी सांस तक क्रिकेट से रहेगा प्यार

युवराज ने जैसे ही संन्यास की घोषणा के लिए "In Conversation with युवराज सिंह" की पोडियम पर कदम रखा उन्होंने कहा "क्रिकेट से अलविदा कहने का यह पल एक मायने में बेहद ही दुखद तो दूसरी तरफ एक सुखद एहसास वाला पल है। मैं शब्दों में शायद इन चीजों को नहीं कह पाऊंगा लेकिन कोशिश करूंगा। 25 साल, 22 गज की पिच और 17 साल के ऑन और ऑफ द फील्ड क्रिकेट के बाद मैं ने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला ले लिया है। क्रिकेट ने मुझे जीवन में वो सब कुछ दिया है जिसकी वजह से मैं आज यहां हूँ। इस खेल से मुझे जितना प्यार है उतनी ही नफरत भी। मैं यह नहीं कह सकता कि इस खेल से नफरत करता हूँ लेकिन इस खेल के लिए जो प्यार था और आज भी मेरे दिल में है वो जीवन के आखिरी सांस तक बनी रहेगी"।

2011 विश्व कप के 'हीरो' रहे युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

क्रिकेट से क्या मिली सीख

क्रिकेट से क्या मिली सीख

क्रिकेट से लगाव पर बोलते हुए युवराज सिंह ने कहा "इस खेल के प्रति मेरी भावना को शायद मैं शब्दों में नहीं बता सकता लेकिन इस खेल ने मुझे लड़ना सिखाया, मुझे जीना सिखाया, गिरकर उठना सिखाया और कैसे कठिन परस्थितियों से लड़ना सिखाया। मैं जीवन में सफल होने से अधिक असफल हुआ लेकिन मैं ने कभी जीवन में हार नहीं मानी और जब तक सांस है तब तक न कभी हार मानूंगा। क्रिकेट ने मुझे सबसे अधिक यही सिखाया है। मैं ने अपने जीवन में क्रिकेट को अपना दिल और अपनी जान सब कुछ दिया जब से मैं ने इसे चुना और खासकर तब जब मैं ने अपने देश का नेतृत्व किया। मैं ने बचपन से अपने पिता के लिए एक सपना देखा कि मैं वर्ल्ड कप खेल सकूं और जीत पाऊं, मुझे इस बात की खुशी है कि मैं उनका यह सपना पूरा कर सका।"

किसका किया शुक्रिया

किसका किया शुक्रिया

संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज ने कहा " मैं हर दिन इस जीवन के लिए ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ। मैं सबसे पहले अपने दो गुरू बाबा अजित सिंह जी और राम सिंह जी का धन्यवाद करता हूँ। मैं अपने मां और पिता का धन्यवाद करना चाहता हूँ जिन्होंने मुझे सही दिशा में गाइड किया और मेरी इस यात्रा में भागीदार रहे। जो लोग मुझसे प्यार करते हैं वो ऑन और ऑफ द फील्ड मेरी सफलता और कामयाबी पर हमेशा गौरव करेंगे। मैं सबसे अधिक अपने फैंस का भी शुक्रिया अदा करता हूं जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से मुझे हमेशा सपोर्ट किया। मुश्किल परिस्थितियों में साथ देने लोगों का शब्दों से शुक्रिया नहीं अदा किया जा सकता जब मेरे लिए समय मुश्किल थे और उन्होंने साथ दिया।

युवराज की जर्नी

युवराज की जर्नी

'मैं अगर अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखता हूं तो यह काफी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। 2011 विश्व कप जीतना, मैन ऑफ द सीरीज घोषित किया जाना, चार मैन ऑफ द मैच यह सब मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था। इसके बाद कैंसर का पता चलना (दुखद क्षण) ऐसा था मानो मैं ने आसमान छुआ हो और रोशनी की स्पीड से जमीन पर तेजी से पटक दिया गया हूँ। यह सब तब हुआ जब मैं अपने करियर के शीर्ष पर था लेकिन जिनके लिए मैं मायने रखता था वो सभी इस विषम परिस्थिति में भी मेरे साथ खड़े रहे। इस हालात में तीन लोग हमेशा मेरे साथ रहे,मेरे फैंस, मेरे दोस्त और मेरा परिवार। युवराज ने अपने कैंसर के इलाज के लिए दोनों डॉक्टर का भी शुक्रिया अदा किया।

कैसा रहा करियर

कैसा रहा करियर

युवराज सिंह ने अपने करियर में कुल 40 टेस्ट, 304 ODI और 58 T20Is मैच खेले। मॉडर्न क्रिकेट के सबसे धाकड़ ऑल राउंडर कहे जाने वाले युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को भले अलविदा कह दिया हो लेकिन वो प्रोफेशनल क्रिकेट खेलते रहेंगे। युवराज सिंह साल 2000 में U-19 WC में मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे, 2007 के टी-20 विश्व कप में भी उन्हें इस खिताब से नवाजा गया और साल 2011 के वर्ल्ड में भी उन्हें यही खिताब मिला था।

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क्रिकेट से प्यार है? साबित करें! खेलें माईखेल फेंटेसी क्रिकेट

Story first published: Monday, June 10, 2019, 15:43 [IST]
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