पोर्ट एलिजाबेथ। जैसी कि उम्मीद थी, वर्ष 2006 में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाले यूरोपीय देश पुर्तगाल और अफ्रीकी महाशक्ति आइवरी कोस्ट की टीमों के बीच नेल्सन मंडेला बे स्टेडियम में मंगलवार को खेला गया फीफा विश्व कप-2010 का ग्रुप-जी मुकाबला रोमांचक भिड़ंत के बाद गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ।
इस कठिन ग्रुप में दोनों टीमें एक-एक अंक पाकर खुद को संतोषजनक स्थिति में पा रही होंगी। अब उनका सामना ग्रुप की सबसे शक्तिशाली टीम ब्राजील और एक लिहाज से सबसे कमजोर टीम उत्तर कोरिया के साथ होना है। इसमें से एक में मिली जीत पुर्तगाल या फिर आइवरी कोस्ट को अंतिम-16 दौर में पहुंचाने के लिए काफी होगी।
क्लिक करें: उत्तर कोरिया के सामने लाचार दिखे काका
विश्व फुटबाल के महान अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ियों में एक क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में खेल रही पुर्तगाल की टीम और दूसरी ओर चेल्सी के स्ट्राइकर दिदिर द्रोगबा जैसे कद्दावर खिलाड़ी की टीम आइवरी कोस्ट ने पहले हाफ में अपनी छवि के अनुरूप खेल दिखाया। पुर्तगाल ने जहां लगातार हमले किए वहीं आइवरी कोस्ट की टीम इस मामले में कम नहीं रही। दोनों टीमों के बीच गोल करने के लिए पूरे 90 मिनट और फिर साढ़े तीन मिनट के इंजरी टाइम (अतिरिक्त समय) में जोरदार जंग हुआ और इसी का नतीजा रहा कि मैच बराबरी पर छूटा।
ऐसे में जबकि अर्जेटीना के लियोनेल मेस्सी अपने पहले ही मैच में नाइजीरिया के खिलाफ अपनी प्रतिभा की शानदार झलक दिखा चुके हैं, सभी फुटबाल प्रेमियों की नजर रोनाल्डो पर टिकी थी। मैच के शुरुआती क्षण में रोनाल्डो अपनी चिरपरिचित लय में नजर आए लेकिन आइवरी कोस्ट के खिलाड़ियों ने उन्हें एक बार भी स्वतंत्र रूप से मैदान में रहने नहीं दिया।
क्लिक करें: फीफा फुटबॉल स्पेशल पेज
तमाम पहरेदारी के बावजूद रोनाल्डो ने 11वें मिनट में 25 गज की दूरी से जो निशाना आइवरी कोस्ट के गोलपोस्ट पर लगाया था, वह अद्भुत था। पुर्तगाल की टीम उस प्रयास के बाद आगे निकल गई होती लेकिन गेंद पोस्ट से टकराकर वापस लौट आई। इसके बाद भी रोनाल्डो ने कई मूव बनाने के प्रयास किए लेकिन वह पहरेदारी की वजह से अपना स्वाभाविक खेल नहीं दिखा सके। 21वें मिनट में पीछे से हुए वार के कारण झल्लाए रोनाल्डो ने आइवरी कोस्ट के खिलाड़ियों पर अपना गुस्सा उतरा, जिसके लिए उन्हें पीला कार्ड दिखाया गया।
यह मैच आइवरी कोस्ट टीम के कोच स्वान गोरान एरिक्सन के लिए भी काफी महत्वपूर्ण था। इग्लैंड को 2002 और 2006 में अंतिम-8 दौर में पहुंचाने वाले एरिक्सन को दुनिया के सबसे कामयाब कोचों में एक माना जाता है और आइवरी कोस्ट टीम के साथ इस बार उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। यही सोचकर एरिक्सन ने द्रोगबा को दूसरे हॉफ में उतारने का फैसला किया। 66वें मिनट में जब द्रोगबा मैदान में आए तब आइवरी कोस्ट के प्रशंसक उत्साह से भर गए लेकिन पुर्तगाल के खिलाड़ियों ने द्रोगबा को एक बार भी स्वतंत्र नहीं घूमने दिया। वैसे भी चोटिल द्रोगबा पुर्तगाली खिलाड़ियों से ज्यादा लड़ना-भिड़ना नहीं चाहते थे क्योंकि वह फिट रहना चाहते हैं क्योंकि उनकी टीम के लिए यही ज्यादा जरूरी था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।