डरबन। यूरोपीयन पावरहाउस हॉलैंड ने खचाखच भरे डरबन स्टेडियम में सोमवार को खेले गए फीफा विश्व कप-2010 के अंतिम-16 दौर के मुकाबले में स्लोवाकिया को 2-1 से हरा दिया।
इस जीत ने हॉलैंड को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया है जबकि पहली बार विश्व कप में खेल रही स्लोवाकियाई टीम का सफर समाप्त हो गया। स्लोवाकिया के लिए इंजरी टाइम के अंतिम मिनट (90+3) में एकमात्र गोल करने वाले रॉबर्ट विट्टेक ने इस विश्व कप में अपना चौथा गोल किया।
हॉलैंड की टीम इस विश्व कप में अब तक अजेय है। उसने ग्रुप स्तर में अपने तीनों मैच जीते थे। अगले दौर में उसकी भिड़ंत ब्राजील और चिली के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगी। यह मैच सोमवार देर रात खेला जाना है। हॉलैंड ने फारवर्ड खिलाड़ी अर्जेन रोबेन द्वारा 18वें मिनट में किए गए गोल की मदद से 1-0 की बढ़त हासिल की थी। जर्मनी के क्लब बेयर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले अनुभवी फारवर्ड रोबेन ने तीन खिलाड़ियों को छकाने के बाद 20 गज की दूरी से लगाए गए शानदार किक की मदद से यह गोल किया। 49वें मैच में यह उनका 12वां गोल है। रोबेन को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
मध्यांतर तक स्लोवाकियाई टीम हॉलैंड की तेजतर्रार आक्रमण पंक्ति को इसी स्कोर पर रोके रही लेकिन वह खुद बराबरी का गोल नहीं कर सकी। मध्यांतर के बाद दोनों टीमों के बीच गोल करने के लिए एक बार फिर जोरदार संघर्ष हुआ। इस दौरान रोबेन के नेतृत्व में हॉलैंड की आक्रमण पंक्ति ने स्लोवाकियाई गोलपोस्ट पर कई हमले किए लेकिन बहुत कम अंतर से वह सफलता से चूक गई।
84वें मिनट में मिडफील्डर वेसले श्नाइडर ने अपनी टीम को दूसरी सफलता दिलाते हुए स्कोर को 2-0 कर दिया। हॉलैंड को जीत हासिल करने के लिए यह अंतर काफी था क्योंकि अब समय बहुत कम रह गया था और स्लोवाकिया की आक्रमण पंक्ति के चेहरे पर थकान हावी होने लगी थी।
इसी बीच अंतिम क्षणों के रोमांच का फायदा उठाकर स्लोवाकियाई खिलाड़ियों ने हॉलैंड की रक्षापंक्ति पर जोरदार हमला किया, जिसे रोकने के प्रयास में गोलकीपर मार्टिन स्टेकेलेनबर्ग फाउल कर बैठे। उन्होंने गोल बचाने के प्रयास में स्लोवाकिया के खिलाड़ी मार्टिन जाकुबको को गलत तरीके से डी-एरिया में गिरा दिया। रेफरी ने इसे फाउल करार दिया और स्लोवाकिया को पेनाल्टी उपहार में मिली। साथ ही स्टेकेलेनबर्ग को पीला कार्ड भी दिखाया गया। इस पेनाल्टी पर विट्टेक ने गोल करके स्कोर 1-2 कर दिया लेकिन इस गोल के साथ मैच खत्म होने की सीटी भी बज उठी।
गोल करने के बावजूद स्लोवाकियाई खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी नहीं थी जबकि गोल खाने के बाद भी हॉलैंड के खेमे में जश्न का माहौल था। हॉलैंड फीफा विश्व कप-2010 के अंतिम-8 दौर में पहुंच गया और स्लोवाकिया को बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
कद और प्रतिष्ठा के लिहाज से दोनों टीमों के बीच कोई बराबरी नहीं थी। हॉलैंड को जहां विश्व वरीयता क्रम में चौथा स्थान प्राप्त है वहीं स्लोवाकिया 34वीं वरीयता प्राप्त टीम है। हालैंड की टीम ने नवंबर 1993 और जून 2009 में दूसरा स्थान हासिल किया था, जो वरीयता क्रम में उसका अब तक का सर्वोच्च स्थान है।
स्लोवाकिया ने मई 1997 में फीफा रैकिंग में 17वां स्थान हासिल किया था, जो उसके लिए अब तक का सबसे अच्छा मुकाम है। इस मैच को लगाकर पिछले 22 मैचों में अजेय रहने का रिकार्ड स्थापित करने वाली हॉलैंड की टीम ने ग्रुप-ई में अपने तीनों मैच जीतकर पूरे नौ अंकों के साथ अंतिम-16 दौर में जगह बनाई थी जबकि स्लोवाकिया की टीम ग्रुप-एफ में दूसरे स्थान पर रही थी।
हॉलैंड की टीम ने यहां तक के सफर के दौरान जहां जापान, डेनमार्क और कैमरून को पराजित किया था वहीं स्लोवाकिया ने मौजूदा चैम्पियन इटली और न्यूजीलैंड को बराबरी पर रोका था लेकिन पराग्वे के खिलाफ उसे हार मिली थी।
अंतिम-16 दौर में इस मैच के अलावा अब तक चार मुकाबले खेले जा चुके हैं। शनिवार को खेले गए पहले मैच में घाना ने अमेरिका को हराया था जबकि उरुग्वे ने दक्षिण कोरिया की चुनौती समाप्त की थी। रविवार को जर्मनी ने जहां इंग्लैंड को बाहर का रास्ता दिखाया वहीं अर्जेटीना ने मेक्सिको को हराकर अपना विजय अभियान जारी रखा है।