जब BCCI का नियम तोड़ पूर्व चयनकर्ता ने एमएस धोनी को खास प्रोग्राम में किया शामिल
नई दिल्ली। पिछले 2 दशक के दौरान भारतीय क्रिकेट ने जिन ऊंचाइयों को छुआ है उसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ उन्हें ढूंढने वाले चयनकर्ताओं का भी बड़ा हाथ है। सौरव गांगुली की कप्तानी के बाद राहुल द्रविड़ से लेकर एमएस धोनी की कप्तानी आने तक इस टीम ने कई उतार-चढ़ाव का सामना किया लेकिन धोनी की कप्तानी में आने के बाद भारतीय टीम एक बार फिर से ऊंचाइयों की ओर बढ़ी और टी20 प्रारूप का पहला विश्व कप और 2011 का वनडे विश्व कप जीतने में कामयाब हुई। इतना ही नहीं इस बीच भारतीय टीम में गेंदबाजी से लेकर फील्डिंग के स्तर में काफी बदलाव देखने को मिला। फील्डिंग में विश्व की खराब टीमों में से एक मानी जाने वाली भारतीय टीम अब खेल के इस विभाग में बेहतर करती नजर आती है।
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जाहिर है इसका श्रेय भारतीय टीम के तत्कालीन कप्तान एमएस धोनी को दिया जाता रहा है, लेकिन धोनी को ढूंढ कर लाने का श्रेय अगर किसी को मिलना चाहिये तो वो है पूर्व खिलाड़ी औक मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर को जिन्होंने बीसीसीआई के नियमों को ताक पर रखकर धोनी को खास प्रोग्राम के लिये चुना और इसी की बदौलत भारतीय टीम में इस महान खिलाड़ी की एंट्री हुई।
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धोनी के लिये वेंगरसरकर ने तोड़ा नियम
भारतीय क्रिकेट टीम की चयनसमिति के मुख्य अध्यक्ष रह चुके दिलीप वेंगसरकर ने बीसीसीआई के टैलेंट रिसोर्स डेवलपमेंट विंग (टीआरडीडब्ल्यू) में एमएस धोनी को शामिल करने के लिये नियम तोड़ा था। बीसीसीआई की ओर से देश भर में प्रतिभा को ढूंढने के लिये टीआरडीडब्ल्यू का खास प्रोग्राम शुरु किया था जिससे दिलीप वेंगसरकर भी जुड़े हुए थे।
बीसीसीआई के इस खास प्रोग्राम में जब धोनी को शामिल किया गया तो उनकी उम्र 21 साल की थी जबकि इससे जुड़ने के लिये खिलाड़ियों की उम्र सीमा 19 वर्ष था। धोनी के लिए वेंगसरकर ने उम्र सीमा का नियम तोड़ा था, जिसके पीछे काफी मजेदार किस्सा भी था।

इस कारण वेंगसरकर ने धोनी को टीआरडीडब्ल्यू में किया शामिल
दिलीप वेंगसरकर ने हाल ही में धोनी के चयन के दिनों को याद करते हुए बताया 21 साल का होने के बावजूद एक मजेदार वाक्ये के चलते उन्हें टीआरडीडब्ल्यू योजना में शामिल किया गया था।
उन्होंने कहा, 'बंगाल के पूर्व कप्तान प्रकाश पोद्दार के कहने पर धोनी को इस प्रोग्राम में शामिल किया गया था। दरअसल पोद्दार जमशेदपुर में एक अंडर-19 मैच देखने गए थे। ठीक उसी वक्त पास के कीनन स्टेडियम में बिहार की टीम वनडे मैच खेल रही थी जहां से गेंद बार-बार स्टेडियम के बाहर अंडर-19 टीम के मैच के बीच आ रही थी। जब गेंद ने कई दफा इस मैच का चक्कर लगाया तो पोद्दार को यह जानने की इच्छा हुई कि आखिर कौन है जो इतनी देर से गेंद को इतनी दूर मार रहा है। इसी उत्सुकता ने धोनी का पता दिया और उन्हे बीसीसीआई के खास प्रोग्राम में शामिल कर लिया गया।'

एनसीए की मौजूदा स्थिति से खुश नहीं वेंगसरकर
वेंगसरकर ने बताया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के कहने पर की गई थी और उनके चुनाव हारने के साथ ही इसे बंद भी कर दिया गया। उन्होंने बताया कि धोनी को पोद्दार के कहने पर ही 21 साल की उम्र के बावजूद धोनी को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया।
राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) की मौजूदा स्थिति से नाराज दिलीप वेंगसरकर ने कहा कि एनसीए की स्थिति विचार करने लायक है क्योंकि यह खिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने के बजाय उनके लिये एक रिहैब सेंटर बनता जा रहा है।
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