अटल बिहारी को अखाड़े से था खास लगाव, इस पहलवान को 'गिफ्ट' की थी बादाम की बोरी
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की अगर बात करें तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने अलग अंदाज और शैली के लिए काफी मशहूर थे। उनके भाषण देने की शैली, उनका मिलनसार स्वभाव उनके राजनैतिक विरोधियों को भी उनका दीवाना बना देता था, उनका यही व्यक्तित्व उन्हें बाकी राजनेताओं से अलग भी बनाता था। जब अटल राजनीति में सक्रिय थे तब भी उनका आम लोगों से मिलना-जुलना काफी चर्चा में रहते थे, देश के सभी वर्ग के लोगों में उनकी लोकप्रियता का होना ही उन्हें भारतीय राजनीति में इतना सफल बनाता है। राजनीति से बहुत पहले संन्यास ले चुके अटल का रिश्ता खेल जगत से भी बेहद करीबी था, अक्सर वो खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते थे और उनके साथ संवाद स्थापित करते थे। ऐसा ही एक किस्सा कुश्ती गुरु महाबली सतपाल ने अटल को श्रद्धांजलि देने के बाद बताया। गौरतलब हो कि । 93 वर्ष की उम्र में अटल बिहारी ने दिल्ली के एम्स में गुरुवार शाम आखिरी सांस ली।
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अलग ही था रिश्ताः
श्रद्धांजलि देते हुए भावुक सतपाल ने कहा कि वो पहलवानों को बहुत प्यार करते थे और उनके निधन से ऐसा लग रहा है कि हमने अपने गुरु जी को खो दिया है। सतपाल ने कहा, 'वाजपेयी जी गुरु हनुमान अखाड़े में बहुत आया करते थे और पहलवानों से मिलते थे। मैं जब 1975 में भारत केसरी और 1976 में रुस्तमे हिन्द बना था तो उन्होंने गुरु हनुमान अखाड़े में मुझे आशीवार्द दिया था। वो मुझे बहुत पसंद करते थे। उनके गुरु हनुमान के साथ बहुत अच्छे सम्बन्ध थे और गुरु हनुमान कहा करते थे कि वह और वाजपेयी लंगोटिया यार हैं।

अखाड़े से था खास लगावः
महाबली सतपाल ने कहा, 'उनके निधन से ऐसा लग रहा है कि हमने अपने गुरु जी को खो दिया है। वो एक महान नेता थे और पहलवानों को बहुत प्यार करते थे और उन्हें हमेशा आशीवार्द दिया करते थे।' उन्होंने कहा, 'वह जब भी अखाड़े में आते थे तो खाना खाए बिना नहीं जाते थे। वो खाने के बहुत शौकीन थे। वो हमेशा हमसे कहते थे कि देश से ऊपर कुछ नहीं है और ताकत का हमेशा सही इस्तेमाल होना चाहिए।

जब अटल ने दी थी बादाम की बोरीः
द्रोणाचार्य अवॉर्डी ने अतीत के सुनहरे पन्नों को पलटते हुए एक वाकया सुनाते हुए कहा कि मुझे याद है कि उन्होंने 1976 में मुझे बादाम की बोरी दी थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने मुझे पीएम हाउस बुलाया था। मैं आखिरी बार उनसे 2008 में मिला था जब हम पहलवान उनके पास फोटो खिंचवाने के लिए गए थे। बता दें कि करीब 66 दिन से अटल दिल्ली के एम्स में भर्ती थे और गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। पूरा देश उनकी मृत्यु पर शोक मना रहा है, वहीं उनके करीबी उनके साथ का अनुभव भी साझा कर रहे हैं।
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