डरबन। फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में एक बार फिर स्पेन ने जर्मनी को रौंद डाला। वर्ष 2008 में जर्मनी को हराकर यूरोपीयन चैम्पियनशिप जीतने वाली स्पेन ने बुधवार को जर्मनी को 1-0 से हराकर पहली बार फुटबॉल विश्व कप के फाइनल में जगह बनायी। स्पेन की इस ऐतिहासिक जीत में एक मात्र गोल करने वाले कार्लेस पुयोल ने अहम भूमिका निभाई। फाइनल में स्पेन की भिड़ंत नीदरलैंड्स से होगी।
डरबन स्टेडियम में खेले गए इस मैच में जर्मनी की टीम स्पेन के आगे बेबस नजर आयी, हालांकि स्पेन को भी गोल करने के बहुत कम मौके मिले, लेकिन 73वें मिनट में सेंट्रल मिडफील्डर कार्लोस पूयोल ने हेडर के माध्यम से शानदार गोल किया। इस गोल से मिली बढ़त अंत तक कायम रही और स्पेन ने अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी जर्मनी को 1-0 से पराजित कर दिया।
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अपनी शानदार पासिंग शैली और मैदान पर बेहतरीन रणनीति तथा सामंजस्य के लिए मशहूर स्पेन की टीम ने खेल के हर विभाग में तीन बार के चैम्पियन जर्मनी को दोयम साबित किया और 11 जुलाई को सॉकर सिटी स्टेडियम में हॉलैंड के साथ खिताबी मुकाबले में खेलने का अधिकार हासिल किया।
उम्मीद के मुताबिक यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा। दोनों टीमों ने श्रेष्ठता की इस जंग में जमकर लोहा लिया और मध्यांतर तक अपने खिलाफ एक भी गोल नहीं होने दिया। 73वें मिनट में स्पेन को मिले कार्नर पर जावी ने किक लिया और अपनी जुझारू शक्ति के लिए मशहूर मजबूत कदकाठी वाले पूयोल ने 15 गज की दूरी से लिए गए गोली की गति वाले हेडर की मदद से गोल करके अपनी टीम को बढ़त दिला दी।
यह अलग बात है कि पूयोल ने यह ऐतिहासिक गोल करके अपनी टीम को फाइनल में पहुंचाया लेकिन दुनिया भर के दर्शकों ने पूरे 90 मिनट तक मैदान का हर एक कोना नापने वाले जावी को मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा। जावी के ही शानदार कार्नर किक पर पूयोल ने स्पेन की बढ़त दिलाई।
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84वें मिनट में स्पेन को बढ़त हासिल करने का एक और शानदार मौका मिला लेकिन प्रेडो ने उसे गंवा दिया। प्रेडो और डेविड विला के स्थानापन्न के तौर पर मौदान में आए फर्नाडो टॉरेस जर्मन डिफेंडरों की गैरमौजूदगी में डीएरिया में पहुंच गए थे लेकिन प्रेडो ने समय रहते टॉरेस को पास नहीं दिया और स्पेन के हाथ से 2-0 की बढ़त हासिल करने का यह मौका निकल गया।
इस हार ने जर्मनी के हाथों से चौथी बार खिताब जीतने का मौका छीन लिया है। अब उसे न चाहते हुए भी 10 जुलाई को दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे के साथ तीसरे और चौथे स्थान के लिए होने वाले प्ले-ऑफ मुकाबले की तैयारी करनी होगी। उरुग्वे को मंगलवार को खेले गए पहले सेमीफाइनल में हॉलैंड के हाथों 2-3 से हार मिली थी।
इस मैच की एक और खास बात यह रही कि भारी दबाव के बावजूद दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने बेहतरीन खेल भावना का परिचय दिया। यही कारण है कि पूरे मैच के दौरान किसी भी खिलाड़ी को किसी प्रकार का कार्ड नहीं दिखाया गया। एक दो मौकों पर खिलाड़ियों को चेताए जाने की घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो इस मैच को फीफा विश्व कप-2010 के सबसे साफ-सुथरे और खेल भावना से भरपूर मैच के तौर पर गिना जा सकता है।