भारत के चंडीगढ़ के एक एथलीट ने हॉकी के खेल में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने भारत के बटाला में नौ साल की उम्र में अपने बड़े भाई के साथ खेलना शुरू किया था। उनके भाई, जो अब पंजाब पुलिस के लिए काम करने वाले राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, ने खेल में उनकी शुरुआती रुचि को प्रभावित किया।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2021 | Men | B कांस्य |
वर्तमान में, वे भारत की तेल और प्राकृतिक गैस निगम के लिए खेलते हैं। वे जालंधर में ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लेते हैं। उनका प्रशिक्षण शासन कठोर है, यह सुनिश्चित करता है कि वे चरम प्रदर्शन पर बने रहें।
उन्हें अपने पूरे करियर में कई कोचों से मार्गदर्शन मिला है। अवतार सिंह उनके निजी कोच हैं, जबकि संदीप संगवान उन्हें क्लब स्तर पर कोच करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, उन्हें नीदरलैंड के स्योर्ड मारिजने द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है।
उन्होंने 2017 में बेल्जियम के खिलाफ भारत के लिए अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया। यह मैच बेल्जियम में हुआ, जो उनके करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। यह डेब्यू उनके कौशल और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण था।
वे एक फॉरवर्ड के रूप में खेलते हैं, एक ऐसा पद जो गति, चपलता और सटीकता की मांग करता है। उनके खेलने की शैली ने उन्हें "बैकहैंड" उपनाम दिलाया है, जो मैदान पर उनके अनोखे कौशल को उजागर करता है।
जर्मन हॉकी खिलाड़ी फ्लोरियन फुच्स उनके करियर पर एक प्रमुख प्रभाव रहे हैं। वे टीम वर्क में विश्वास करते हैं और अक्सर कहते हैं, "एक आदमी युद्ध नहीं लड़ सकता। लेकिन एक सेना लड़ सकती है। टीम वर्क हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।" यह दर्शन उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिता दोनों के प्रति दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
उनके परिवार का हॉकी से गहरा संबंध है। उनके बड़े भाई ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल खेला था, इससे पहले कि वे सेवानिवृत्त हुए। यह पारिवारिक समर्थन उनके एक एथलीट के रूप में विकास में महत्वपूर्ण रहा है।
अपनी खेल उपलब्धियों के अलावा, वे भारत की तेल और प्राकृतिक गैस निगम में खेल कोटे के कार्यक्रम के तहत कार्यरत हैं। यह रोजगार उन्हें बिना किसी वित्तीय बाधा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित करने और प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देता है।
आगे देखते हुए, उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना जारी रखना है। उनका ध्यान अपने कौशल में सुधार और आगामी टूर्नामेंट में अपनी टीम की सफलता में योगदान देने पर बना हुआ है।
यह एथलीट की बटाला से अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों तक की यात्रा उनके हॉकी के प्रति समर्पण और जुनून को प्रदर्शित करती है। कोचों और परिवार से निरंतर समर्थन के साथ, वे खेल में आगे की उपलब्धियों के लिए तैयार हैं।