भारत के जालंधर के एक कुशल एथलीट मनप्रीत सिंह ने हॉकी की दुनिया में महत्वपूर्ण प्रगति की है। खेल के प्रति जुनून के साथ जन्मे मनप्रीत ने नौ साल की उम्र में खेलना शुरू किया और 2005 में जालंधर में ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी अकादमी में औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2021 | Men | B कांस्य |
| 2016 | Men | 8 |
| 2012 | Men | 12 |
मनप्रीत ने 2011 में चीन के ओर्डोस में भारत के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। मिडफील्डर के रूप में खेलते हुए, वह अपने पूरे करियर में दाएं हाथ के खिलाड़ी रहे हैं। उनकी यात्रा कई प्रशंसाओं और उपलब्धियों से भरी रही है।
2019 में मनप्रीत को अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) का पुरुष खिलाड़ी ऑफ द ईयर चुना गया। उन्हें एशियाई हॉकी महासंघ द्वारा 2018 का प्लेयर ऑफ द ईयर और 2014 का एशियाई जूनियर प्लेयर ऑफ द ईयर भी चुना गया।
मनप्रीत को अपने करियर के दौरान कई चोटों का सामना करना पड़ा। 2009 में घुटने की चोट के कारण वे लगभग एक साल तक प्रतिस्पर्धा से बाहर रहे। 2014-15 में, बेल्जियम के एंटवर्प में वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल के दौरान उनकी पिंडली में चोट लग गई, जिसके कारण वे भारत के फ्रांस और स्पेन दौरे से चूक गए।
मनप्रीत जालंधर में अपनी पार्टनर इल्ली नजवा सद्दीकी के साथ रहते हैं, जिनसे उनकी मुलाकात 2013 में मलेशिया में सुल्तान ऑफ जोहोर कप में जीत के बाद हुई थी। 2016 में उनकी सगाई हुई थी। मनप्रीत को ध्यान लगाना, संगीत सुनना, कंप्यूटर गेम खेलना, दोस्तों के साथ समय बिताना, फिल्में, कार और मोटरसाइकिल देखना पसंद है।
मनप्रीत का खेल दर्शन उनके आदर्श वाक्य में समाहित है: "हॉकी वर्णमाला के छह अक्षर हैं, लेकिन मेरे लिए यह सभी 26 हैं।" यह खेल के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उनके बड़े भाई अमनदीप और सुखराज दोनों ही भारतीय राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में पंजाब के लिए खेल चुके हैं। हॉकी में इस पारिवारिक पृष्ठभूमि का मनप्रीत के करियर पर महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है।
मनप्रीत का लक्ष्य 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचना और भारत में होने वाले 2023 विश्व कप को जीतना है। ये लक्ष्य हॉकी में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए उनके निरंतर समर्पण को दर्शाते हैं।
मनप्रीत सिंह का अपने भाइयों से प्रेरित एक युवा लड़के से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले हॉकी खिलाड़ी तक का सफ़र उनकी कड़ी मेहनत और खेल के प्रति जुनून का सबूत है। उनकी उपलब्धियाँ और भविष्य की महत्वाकांक्षाएँ कई महत्वाकांक्षी एथलीटों को प्रेरित करती रहती हैं।