पहले टेनिस फिर क्रिकेट और अब विंबलडन 2021 विजेता, जानें कौन हैं एश्ले बार्टी जिसका करियर रहा है इतना अलग
नई दिल्ली। टेनिस जगत के सबसे पुराने और बड़े ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट विंबलडन के 129वें एडिशन के फाइनल में शनिवार को ऑस्ट्रेलियाई टेनिस खिलाड़ी एश्ले बार्टी ने चेक गणराज्य की कैरोलिना लिस्कोवा को हराकर अपना पहला विंबलडन खिताब जीता। दुनिया की नंबर 1 महिला टेनिस स्टार एश्ले बार्टी पिछले 41 सालों में विंबलडन के महिला सिंगल्स का खिताब जीतने वाली पहली ऑस्ट्रेलियाई महिला खिलाड़ी हैं। एश्ले बार्टी ने अपने प्रोफेशनल करियर का आगाज भी 2014 में विंबलडन जूनियर की जीत के साथ ही किया था और विंबलडन 2021 में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के सिंगल्स में खिताब को मिटाने वाली खिलाड़ी भी बनीं।
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25 वर्षीय एश्ले बार्टी के टेनिस करियर का यह दूसरा सिंगल्स ग्रैंडस्लैम है। विंबलडन 2021 से पहले बार्टी ने 2019 के फ्रेंच ओपन में जीत हासिल की थी और इस जीत के साथ ही उन्होंने अपने आदर्श इवोन गुलागोंग के कारनामे को दोहराया जिन्होंने 1980 में आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया के लिये विंबलडन का खिताब जीता था। हालांकि इस दिग्गज टेनिस स्टार का करियर इतने छोटे से समय में कई मोड़ तय करने के बाद यहां तक का फासला तय किया है। आइये एक नजर उन अहम पड़ाव पर डालते हैं।
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ऐसा रहा है अब तक का करियर
24 अप्रैल 1996 को जन्मी एश्ले बार्टी प्रोफेशन से एक क्रिकेटर और टेनिस खिलाड़ी दोनों ही रह चुकी हैं। महिला सिंगल्स और डबल्स दोनों ही प्रारूप में बार्टी ने अपने करियर के कई बड़े आयाम हासिल किये। एश्ले बार्टी इस समय वर्ल्ड टेनिस एसोसिएशन की रैंकिंग में नंबर 1 पर काबिज हैं और यह मुकाम हासिल करने वाली दूसरी ऑस्ट्रलियाई हैं। बार्टी से पहले इवोन गलागोंग ने ही यह कारनामा किया था। बार्टी ने डबल्स में भी अपने करियर की बेस्ट रैंकिंग हासिल करते हुए नंबर 5 पर जगह बनाई है। बार्टी ने अपने टेनिस करियर में अब तक 12 सिंगल्स और 11 डबल्स का खिताब जीता है। इस दौरान बार्टी ने 3 ग्रैंड स्लैम जीते हैं जिसमें विंबलडन 2021 (सिंगल्स), फ्रेंच ओपन 2019 (सिंगल्स) और यूएस ओपन 2018 (डबल्स) शामिल है।

विंबलडन जूनियर के साथ किया करियर का आगाज
बार्टी ने महज 4 साल की उम्र में ही टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और जूनियर बैंडमिंटन रैंकिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए नंबर 2 की रैंकिंग पर पहुंची थी। एश्ले बार्टी ने 2011 के जूनियर विंबलडन (सिंगल्स) का खिताब जीतकर साफ कर दिया कि वो अपने करियर में काफी कुछ हासिल करने वाली हैं। बार्टी ने अपने जूनियर करियर के दौरान डबल्स में भी काफी सफलता हासिल की। केसी डेलिक्वा के साथ बार्टी ने WTA टूर 2013 के 3 ग्रैंडस्लैम इवेंट के फाइनल में जगह बनाई, हालांकि बतौर रनर अप ही उन्होंने टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया, इसमें ऑस्ट्रेलियन ओपन भी शामिल रहा। हालांकि 2014 के आखिरी महीनों में बार्टी ने टेनिस अनिश्चितकालीन समय के लिये ब्रेक लेने का फैसला किया और टेनिस खेलना छोड़ दिया।

क्रिकेट में करियर का आगाज कर बीबीएल में की शिरकत
एश्ले बार्टी ने ब्रेक लेने के बाद क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया और क्वीन्सलैंड की घरेलू टीम के साथ ट्रेनिंग शुरू कर दी। इसके चलते बार्टी को क्वीन्सलैंड फायर के लिये खेलने का मौका मिला और अपने प्रदर्शन के दम पर इस महिला खिलाड़ी ने ब्रिसबेन हीट के साथ बिग बैश लीग के 2015-16 सीजन का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। हालांकि क्रिकेट में बार्टी का करियर कुछ खास नहीं रहा और बीबीएल के 9 मैचों में वो सिर्फ 68 रन ही बना सकी, इसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 39 रन रहा। लगभग 2 साल तक क्रिकेट खेलने के बाद एश्ले बार्टी ने अपने क्रिकेट करियर से ब्रेक लेने का फैसला कर दोबारा से टेनिस में कदम रखने का फैसला किया।

जीत के साथ टेनिस में की वापसी
बार्टी ने 2016 में टेनिस में लौटने का ऐलान किया और पहले दो महीने में जिन 5 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उसमें से 3 में जीत हासिल की। 2017 में बार्टी ने डेलिका के साथ फिर से जोड़ी बनाई और साल के अंत तक 250वीं रैकिंग से टॉप 20 में जगह बनाने में कामयाब हो गई। इसके बाद बार्टी रुकी नहीं और आज विंबलडन का खिताब जीतने वाली दूसरी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बनी। बार्टी ने फाइनल मैच में कैरोलीना को 6-3, 6-7 (4) और 6-3 के सेटों में हराकर जीत हासिल की और अपना पहला विंबलडन खिताब जीता।
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