सौरव, सचिन या अजहरुद्दीन, वेंकटेश प्रसाद ने बताया कौन था बेस्ट कप्तान
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे कप्तान हुए हैं जिन्होंने अपनी कप्तानी में देश के परचम को एक नई बलंदियों तक पहुंचाने का काम किया है। इस दौरान कई खिलाड़ियों को एक से ज्यादा कप्तानों के अंदर खेलने का मौका मिला तो कई प्लेयर्स ने एक ही कप्तान के अंडर अपना पूरा करियर बिता दिया। भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद उन खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने अपने करियर के दौरान कई भारतीय कप्तानों के साथ खेलने का लुत्फ उठाया। द ग्रेड पॉकास्ट के साथ बातचीत करते हुए वेंकटेश प्रसाद ने अपने करियर के दौरान खेले गये कप्तानों के बीच फर्क के बारे में बात करते हुए बताया कि सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन और सौरव गांगुली में से कौन उनका पसंदीदा और बेस्ट कप्तान था।
वेंकटेश प्रसाद ने भारतीय टीम में अपने करियर की शुरुआत तब की थी जब टीम की कमान मोहम्मद अजहरुद्दीन के हाथों में थी और अपना आखिरी मैच उन्होंने सौरव गांगुली की कप्तानी में खेला। इस दौरान वो दो बार सचिन तेंदुलकर की कप्तानी वाली टीम का भी हिस्सा रहे थे। इस पर बात करते हुए वेंकटेश ने बताया कि उन्हें अजहरुद्दीन की कप्तानी में खेलना सबसे ज्यादा पसंद था।
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उन्होंने कहा, 'मैं इस सवाल के जवाब में काफी डिप्लोमेटिक रहूंगा। मेरे लिये इस सवाल का जवाब देने से ज्यादा यह कहना आसान रहेगा कि हर किसी की कप्तानी का अंदाज अलग होता है लेकिन सच तो यह है कि मैंने अजहर की कप्तानी में सबसे ज्यादा अच्छा महसूस किया, क्योंकि वह आपको गेंद पकड़ाकर सिर्फ यह पूछते थे कि फील्डिंग कैसी चाहिये और जब मैं फील्ड सेट करता था तो उसके हिसाब से गेंदबाजी करना मेरी जिम्मेदारी हो जाती थी।'
गौरतलब है कि वेंकटेश प्रसाद ने साल 1994 से 1996 तक मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में क्रिकेट खेला जिसके बाद सचिन तेंदुलकर को भारतीय टीम की कमान थमा दी गई। आपको बता दें कि वेंकटेश प्रसाद की गिनती भारत के सबसे शानदार गेंदबाजों में की जाती है और पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने कई बार भारत के लिये मैच विनिंग प्रदर्शन किया है।
गांगुली और सचिन की कप्तानी पर बात करते हुए उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मुझे कभी सचिन तेंदुलकर या सौरव गांगुली की कप्तानी में कोई दिक्कत हुई थी लेकिन मुझे लगता है कि मैंने अपना बेस्ट प्रदर्शन मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में ही दिया था। इसके अलावा हैदराबाद से कर्नाटक ज्यादा दूर नहीं होने के चलते वो अक्सर मिलने आया करते थे। हम एक दूसरे को अच्छे से जानते थे, जोनल स्तर पर साथ खेलते थे तो इस कारण से हम एक दूसरे को ज्यादा बेहतर तरीके से समझते थे।'
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