फखर जमान के रन आउट से शुरू हुआ नया विवाद, जानें क्या है फेक फील्डिंग को लेकर आईसीसी के नियम
Fakhar Zaman Quinton de kock fake Fielding controversy: नई दिल्ली। साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच खेली जा रही 3 मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मैच रविवार को वॉडर्स पार्क में खेला गया जहां पर अफ्रीकी टीम ने 17 रनों से जीत हासिल कर सीरीज में बराबरी कर ली है। पाकिस्तान के लिये फखर जमान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ा निजी स्कोर बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया और 193 रनों की पारी खेली हालांकि वह अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके। फखर जमान पारी के 50वें ओवर में रन आउट के रूप में पवेलियन वापस लौटे, हालांकि वह जिस तरह से आउट हुए उसने खेल जगत में फेक फील्डिंग को लेकर एक नई चर्चा शुरु कर दी है।
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दरअसल फखर जमान के रन आउट में क्विंटन डिकॉक का बड़ा हाथ रहा जिन्होंने फील्डिंग के दौरान ऐसा अहसास दिलाया कि गेंद नॉन स्ट्राइक एंड पर जा रही है जबकि मार्करम को थ्रो स्ट्राइकर एंड पर आ रहा था। इस चक्कर में फखर जमान थोड़ा धीमा हो गये और गेंद सीधा जा कर विकेट पर लगी और वो रन आउट हो गये। फखर जमान के रन आउट के बाद खेल जगत के दिग्गज फेक फील्डिंग को मांकड़िंग जितना ही खराब बताते हुए खेल भावना को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
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अनफेयर प्ले के अंदर आता है फेक फील्डिंग का नियम
ऐसे में सवाल उठता है किया आईसीसी ने फेक फील्डिंग को लेकर कोई नियम नहीं बनाये हैं जिसकी वजह से यह घटना देखने को मिली है। मैरीलिबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम 41.5.1 के अनुसार मैदान पर किसी भी फील्डर की ओर से शब्दों या अपने एक्शन से बल्लेबाज को भटकाने, धोखा देने या फिर रन लेने के दौरान बाधा उत्पन्न करना गलत है। स्ट्राइकर एंड पर भाग रहे खिलाड़ी को जानबूझ कर भटकाने की कोशिश करना भी अनफेयर प्ले के अंतर्गत ही आता है।
आईसीसी के क्लॉज 41 के तहत यह नियम सभी टेस्ट, वनडे और टी20 मैचों में लागू होता है और इस पर सभी खिलाड़ियों और सहायक सदस्यों पर कार्रवाई की जा सकती है।

जानें क्या होती है सजा
गौरतलब है कि अगर किसी खिलाड़ी को फेक फील्डिंग का दोषी पाया जाता है तो मैदानी अंपायर इस गेंद को डेड घोषित कर देता है और ऐसा करने वाली टीम पर 5 रन का जुर्माना लगाया जाता है। साथ ही ऐसा करने वाले खिलाड़ी के खाते में एक डिमेरिट अंक जोड़ने का भी प्रावधान है। हालांकि ऐसा करने के लिये सामने वाली टीम को आपत्ति जतानी होती है। रविवार को हुए मैच में फखर जमान ने आउट होने के बाद अपनी आपत्ति नहीं जताई जिसके चलते ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और वो 193 रन के स्कोर पर वापस पवेलियन लौट गये।

पहले भी घट चुकी है फेक फील्डिंग की घटनायें
आपको बता दें कि क्रिकेट इतिहास में इस तरह की घटनायें पहले भी घट चुकी हैं। 2019 में हुई एशेज सीरीज के 5वें टेस्ट मैच में जॉनी बेयरस्टो ने गेंद नहीं होने के बावजूद फेक रन आउट करने की कोशिश की जिसके चलते स्मिथ ने डाइव लगा दी। हालांकि मैदानी अंपायर्स माराइस एरॉसमस और कुमार धर्मसेना ने ऑस्ट्रेलिया के खाते में इसको लेकर 5 एक्स्ट्रा रन नहीं दिये। वहीं 2015 में श्रीलंकाई कप्तान कुमार संगाकारा ने भी पाकिस्तान के अहमद शहजाद के खिलाफ कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की थी लेकिन तब तब फेक फील्डिंग आईसीसी के नियमों में शुमार नहीं था। 2017 में ऑस्ट्रेलिया के मार्नस लाबुशाने को जेएलटी कप के दौरान फेक फील्डिंग करने की कोशिश में दंडित किया गया था।
आपको बता दें कि इस नियम की सबसे बड़ी मुश्किल बात यह है कि फेक फील्डिंग में फील्डर की भावना को तय करना मैदानी अंपायर्स के हाथ में है कि उसने यह चीज जानबूझ कर की है या फिर आवेश में हो सकी। इसके चलते इस नियम पर अक्सर विवाद देखने को मिलता है।
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