मैच फिक्सिंग का अड्डा बन चुका है भारत, ICC ने दिया बड़ा बयान
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 1999 से साल 2000 का वो दौर हमेशा एक बुरे सपने की तरह याद किया जाता है। यह वही वक्त था जब भारतीय क्रिकेट टीम को मैच फिक्सिंग के जिन्न ने जकड़ लिया था। भारतीय टीम को यहां से वापस बुलंदियों तक पहुंचाने के लिय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने काफी मेहनत की और एक बार फिर से टीम को वो खोया सम्मान वापस हासिल किया। हालांकि आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट के ताजा बयान बीसीसीआई की परेशानियों को बढ़ा दिया है कि मैच फिक्सिंग के मामले में भारत नया अड्डा बनता जा रहा है।
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आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट ने साफ किया है कि मौजूदा समय में वह फिक्सिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े जितने मामलों की जांच कर रहा है उनमें से ज्यादातर के तार भारत से जुड़े हैं। आईसीसी के अनुसार साल 2013 में सामने आई आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग के बाद सट्टेबाज घरेलू लीग को निशाना बना रहे हैं।
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भारत से हैं मैच फिक्सिंग के 50 मामले
एक अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट के अधिकारी स्टीव रिचर्डसन ने बयान जारी करते हुए कहा कि मौजूदा समय के 50 मामले भारत से जुड़े हैं। हालांकि इसमें किसी भी खिलाड़ी का नाम शामिल नहीं हैं।
उन्होंने कहा, 'हम फिलहाल भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों की जांच कर रहे हैं और इनमें 50 मामले भारत से जुड़े हुए हैं। खिलाड़ी चेन का आखिरी हिस्सा होते हैं। परेशानी यह है कि जो वाकई में इससे जुड़े हैं वह मैदान के बाहर बैठते हैं। मैं भारतीय सरकारी एजेंसियों को ऐसे आठ नाम दे सकता हूं जो खिलाड़ियों को पैसा देकर उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।'

अभी भी जारी है कर्नाटक प्रीमियर लीग की जांच
गौरतलब है कि पिछले साल आयोजित हुए घरेलू टी20 लीग केपीएल (कर्नाटक प्रीमियर लीग) में कई लोग मैच फिक्सिंग के मामले में आरोपी पाये गये थे, इसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ टीम के मालिकों का नाम भी शामिल था। इन लोगों के खिलाफ जांच के लिए चार्ज शीट भी दायर कर जांच जारी है।
बीसीसीआई के एसीयू के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा, 'गैर-कानूनी सट्टेबाजी से पैसा कमाने के लिए यह सब किया जाता है। इसके लिए टीम के अधिकारी, मालिक, स्पोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों से संपक किया जाता है। हर साल इससे 3 से चार हजार का टर्नओवर हासिल करते हैं।'

भारत को कानून बनाने की सख्त दरकार
मैच फिक्सिंग को लेकर आईसीसी का मानना है कि भारत में स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी जब तक यहां मैच फिक्सिंग को लेकर सख्त कानून बनाकर अपराध घोषित नहीं किया जाता।
रिचर्डसन ने कहा, 'मैच फिक्सिंग के खिलाफ कानून लाने वाला पहला देश श्रीलंका था इसलिए वहां क्रिकेट सुरक्षित हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया में चीजे काफी बेहतर हैं। हालांकि भारत में ऐसा कोई कानून नहीं जिसके कारण बीसीसीआई वहां खुलकर काम नहीं कर पाती है।'
आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के कानून के मुताबिक वह किसी को भी बड़े टूर्नामेंट होने से पहले वह किसी भी शख्स को अपने देश में आने से रोक सकते हैं। भारत में 2021 टी20 वर्ल्ड कप और 2023 वनडे वर्ल्ड कप होने वाला है ऐसे में कानून में बदलाव काफी अहम हो सकता है।
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