नीरज चोपड़ा ने किया खुलासा, बताया-कैसे तैयार हुआ गोल्ड का रोडमैप, पीएम मोदी ने की तारीफ
नई दिल्ली। जापान की राजधानी टोक्यो में खेले जा रहे ओलंपिक खेलों में भारत के भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वह भारत के लिये एथलेटिक्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने हैं तो वहीं पर इंडिविजुअल इवेंट में अभिनव बिंद्रा के बाद यह कारनामा करने वाले दूसरे खिलाड़ी बने। ओलंपिक में भारत का परचम लहराने वाले नीरज चोपड़ा की उपलब्धि पर पूरा देश जश्न मना रहा है और इस जश्न में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।
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पीएम मोदी ने नीरज चोपड़ा की जीत पर बधाई देते हुए ट्वीट कर जानकारी दी और बताया कि उन्होंने नीरज का मैच खत्म होने के बाद फोन कर उन्हें गोल्ड जीतने पर बधाई दी और देश का मान बढ़ाने के लिये उनकी तारीफ भी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि इस खिलाड़ी ने खेल में देश के टैलेंट और खिलाड़ी की खेल भावना को बुलंदियों पर पहुंचाने का काम किया है।
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जानें क्या बोले पीएम मोदी
उल्लेखनीय है कि नीरज चोपड़ा ने भालाफेंक के फाइनल में पहले ही प्रयास में 87.03 मीटर का मार्क हासिल कर गोल्ड मेडल की दावेदारी को पेश किया, हालांकि उन्होंने अपना बेस्ट थ्रो दूसरे प्रयास में फेंका और 87.58 मीटर की दूरी हासिल की। पीएम मोदी ने नीरज चोपड़ा की मेहनत और लगन की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ओलंपिक में इसका भरपूर प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा,'अभी-अभी नीरज चोपड़ा के साथ बात की और गोल्ड जीतने पर बधाई दी। उन्होंने जिस तरह से टोक्यो ओलंपिक 2020 में जिस तरह से अपनी कड़ी मेहनत और लगन का प्रदर्शन किया उसकी भी तारीफ की। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के टैलेंट और खेल भावना का लोहा मनवाया दिया है। भविष्य में आने वाली सभी प्रतियोगिताओं के लिये उन्हें शुभकामनायें।'

नीरज ने बताया कैसे बना ओलंपिक का रोडमैप
वहीं पर नीरज चोपड़ा ने मैच के बाद बात करते हुए अपने ओलंपिक तक के सफर के बारे में बात की और बताया कि कैसे उतार-चढ़ाव के बाद वो यहां तक पहुंचे और देश के लिये गोल्ड मेडल हासिल करने में कामयाब रहे।
उन्होंने कहा,'मुझे याद है जब मैंने 2019 में भारत में खेले जाने वाले ओपन नेशनल इवेंट के लिये क्वालिफाई कर लिया था और मेरी फ्लाइट की टिकट भी बुक हो चुकी थी। मैं लगातार पदक हार रहा था इस वजह से मैं यहां पर होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेना चाहता था। उस वक्त मुझे आदिल सर की कॉल आयी जिन्होंने मुझे उसमें भाग लेने से रोककर ओलंपिक पर ध्यान लगाने की बात करते हुए कहा कि अगर मैंने इसमें भाग लिया तो ओलंपिक की तैयारियों में दिक्कत हो सकती है। उस वक्त मैंने प्लान कैंसिल किया और आज अहसास हो रहा है कि वो एक अच्छा निर्णय था। मैंने कड़ी मेहनत की और खुद को अच्छे से तैयार किया।'

ओलंपिक में हर पदक सालों की मेहनत का नतीजा
नीरज ने आगे कहा कि मुझे लगता है ओलंपिक में खेला गये किसी भी मैच में हासिल किया गया पदक एक दिन की मेहनत का असर नहीं है बल्कि सालों की अभ्यास और कई सारे लोगों के समर्थन का नतीजा है, जैसा कि मुझे मिल यह पदक भी सालों की मेहनत और बहुत सारे लोगों के समर्थन का नतीजा है।
गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडल के साथ ही भारतीय टीम ने ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 7 पदक के साथ लंदन ओलंपिक्स के प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया। आपको बता दें कि भारत के लिये नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल हासिल किया तो वहीं रवि कुमार दहिया और मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल दिलाया। इनके अलावा पीवी सिंधु, बजरंग पुनिया, लवलिना बोरोगोहिन और पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
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