क्या मुनाफे के चक्कर में ICC टूर्नामेंट को नजरअंदाज कर गई BCCI, भारत के खराब प्रदर्शन में कितनी जिम्मेदार
नई दिल्ली। यूएई में खेले जा रहे टी20 विश्वकप में भारतीय टीम को पहले दो मैचों के खराब प्रदर्शन का खामियाजा उसके ग्रुप स्टेज से बाहर हो जाने के साथ मिला। पाकिस्तान के खिलाफ खेले गये पहले मैच में भारतीय टीम को 10 विकेट से हार मिली तो वहीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे मैच में उसे 8 विकेट से मात का सामना करना पड़ा। पहले दो मैचों में मिली करारी हार के बाद भारतीय टीम ने जबरदस्त वापसी जरूर की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। भारतीय टीम के लिये सेमीफाइनल में पहुंचने की सभी राहें बंद हो चुकी थी, ऐसे में जब 9 साल में पहली बार विराट सेना आईसीसी के किसी टूर्नामेंट के नॉकआउट स्टेज पर नहीं पहुंच सकी तो उसे काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
फैन्स ने टीम मैनेजमेंट और विराट कोहली की कप्तानी पर सवाल उठाते हुए काफी आलोचना की और हार का जिम्मेदार बताया। पर यहां पर सवाल यह है कि क्या वाकई में यहां पर सारी गलती टीम मैनेजमेंट की है जिनके गलत फैसलों और खराब टीम कॉम्बिनेशन की वजह से भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंच पाने में नाकाम रही या फिर बीसीसीआई ने मुनाफा कमाने के लिये आईसीसी टूर्नामेंट को नजरअंदाज करने की बड़ी गलती की।

4000 हजार करोड़ बचाने के चक्कर में गंवायी ट्रॉफी
उल्लेखनीय है कि इंडियन प्रीमियर लीग का 14वां सीजन भारत में खेला जा रहा था कि बायोबबल में कोरोना विस्फोट होने के चलते टूर्नामेंट को बीच में ही रोकना पड़ा, जिसके बाद बचे हुए मैचों का आयोजन अधर में लटक गया। सब के सामने सवाल यही था कि जिस तरह से क्रिकेट का शेड्यूल पैक है वहां पर लीग के बचे हुए मैचों का आयोजन मुश्किल है। हालांकि बीसीसीआई ने इंग्लैंड दौरे और टी20 विश्वकप के बीच के समय को आईपीएल के बचे हुए मैचों के आयोजन के लिये इस्तेमाल करने का फैसला किया और इस दौरान खेली जाने वाली द्विपक्षीय सीरीज को आगे के लिये स्थगित कर दिया। इतना ही नहीं बीसीसीआई ने कैरेबियन प्रीमयिर लीग के आयोजकों से बात कर शेड्यूल में बदलाव करने के लिये मना लिया ताकि आईपीएल में विदेशी खिलाड़ी हिस्सा ले सके।
ऐसे में उम्मीद थी कि जब बीसीसीआई शेड्यूल जारी करेगी तो 10 अक्टूबर तक फाइनल हो जायेगा और खिलाड़ियों को विश्वकप से पहले एक हफ्ते का समय मिल जायेगा, हालांकि ऐसा हुआ नहीं और फाइनल 15 अक्टूबर को खेला गया। इसके चलते खिलाड़ियों को वो आराम नहीं मिल सका जिसकी उन्हें दरकार थी। कोरोना की वजह से जब खेल को बीच में रोकना पड़ा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा था कि अगर हम बचे हुए मैचों का आयोजन नहीं करा पाते हैं तो बोर्ड को 4 हजार करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ेगा, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बोर्ड ने नुकसान से बचने के लिये आईसीसी टूर्नामेंट को वो तवज्जो नहीं दी जिसकी उसे दरकार थी और भारतीय टीम को खामियाजा भी भुगतना पड़ा।

खिलाड़ियों ने की बायोबबल से परेशानी की बात
भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गये मैच में मिली हार के बाद जब जसप्रीत बुमराह से बात की गई तो उन्होंने बायोबबल में होने वाले मानसिक तनाव की बात की और बताया कि कैसे खिलाड़ियों को लगातार 6 महीने से बायोबबल में रहने का नुकसान उठाना पड़ा। जसप्रीत बुमराह ने बताया कि पिछले 6 महीने से हमारी टीम के खिलाड़ी लगातार बायोबबल में मैच खेल रहे हैं और घर से दूर रहते हुए बायोबबल में खेलना किसी के लिये भी आसान नहीं होता, क्योंकि इससे मानसिक हेल्थ पर काफी प्रभाव पड़ता है। जब आप घर से दूूर होते हैं तो ऐसी परिस्थिति में खेल पाना आसान नहीं होता है, खासतौर से जब आपको परिवार से इतने लंबे समय तक के लिये दूर रहना पड़ता है।

रवि शास्त्री ने भी की थी ब्रेक की मांग
वहीं नामिबिया के खिलाफ खेले गये आखिरी मैच के दौरान रवि शास्त्री ने भारतीय टीम के बिजी शेड्यूल पर बात करते हुए कहा था कि खिलाड़ियों को आईपीएल 2021 के दूसरे लेग और टी20 विश्वकप के बीच छोटा सा ब्रेक मिलना चाहिये था। रवि शास्त्री ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि हमारे खिलाड़ी पिछले 6 महीने से लगातार खेल रहे हैं और बायोबबल में खेलना आसान नहीं है, खासतौर से कोरोना महामारी के समय में। हमें समझना होगा कि यह भी इंसान है न कि कोई मशीन जिसमें पेट्रोल डालकर उन्हें खिलाते रहे। अगर खिलाड़ियों को आईपीएल और टी20 विश्वकप के बीच थोड़ा सा ब्रेक मिलता तो बेहतर होता और उनकी मेंटल हेल्थ को ज्यादा बेहतर काम करने में मदद मिलती।
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