'जल्द आयेगी चक दे इंडिया 2.0', ब्रॉन्ज मेडल से चूकने के बाद कैसे भारतीय हॉकी टीम के कोच ने बढ़ाया हौंसला
नई दिल्ली। जापान की राजधानी टोक्यो में जारी ओलंपिक खेलों में शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बेहद करीब थी लेकिन आखिरी लम्हों में चूक गई, भले ही भारतीय महिला टीम को इस मैच में हार का सामना करना पड़ा लेकिन जिस तरह से उसने अपनी लड़ाई लड़ी उसने करोड़ों भारतीयों को प्रेरणा दी है। जिस तरह से बॉलीवुड फिल्म चक दे इंडिया फिल्म में शाहरूख खान की महिला टीम ने इतिहास रचा उसी तरह से जोर्ड मरीन की भारतीय महिला टीम ने ओलंपिक में उसे हकीकत कर दिखाया।
ओलंपिक में भारतीय महिला टीम ने पहले 3 मैच में हार के बाद जिस तरह से वापसी करते हुए पहले क्वार्टरफाइनल और फिर अपने से ज्यादा ताकतवर टीम ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल में हराकर इतिहास रचा उसने करोड़ों फैन्स को महिला हॉकी टीम के सपनों पर भरोसा करना सिखाया।
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यहां से भारतीय टीम को हर मैच में अपने से ज्यादा ताकतवर टीम के खिलाफ खेलना था। सेमीफाइनल में इस भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को जबरदस्त टक्कर दी लेकिन आखिरी पलों में मैच अपने नाम नहीं कर सकी और उसे ब्रॉन्ज मेडल मैच के लिये ग्रेट ब्रिटेन का सामना करने के लिये उतरना पड़ा। ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने ओलंपिक के पूल मैच में पहले भी भारत को हराया था लेकिन ब्रॉन्ज मेडल मैच में उतरी भारतीय टीम पिछली बार से अलग थी। भारतीय टीम ने आखिरी मिनट तक अपना सबकुछ दिया लेकिन ब्रॉन्ज जीतने से चूक गई।
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रुकने वाली नहीं है यह भारतीय टीम
ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने भारतीय महिला टीम को 4-3 से हराया। मैच के बाद कोच मरीन ने भारतीय टीम की तारीफ करते हुए कहा कि भले ही हम पदक नहीं जीत सके हों लेकिन हमारे खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया है। 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद भारतीय महिला टीम से जुड़े डच कोच जोर्ड मरीन के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक के इतिहास में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और सभी बाधाओं को पार करते हुए बता दिया है कि आपको भरोसा रखने की जरूरत है, यह भारतीय टीम रुकने वाली नहीं है।

चक दे इंडिया 2 बनाने का समय
कोच मरीन ने ओलंपिक सफर पर बात करते हुए कहा कि यह सफर इतना प्रेरणादायक रहा है कि बॉलीवुड में फिल्म निर्माता चक दे इंडिया 2 बनाने के बारे में सोच सकते हैं। मरीन ने शाहरुख खान को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस खिलाड़ी ने जो स्पीच अपनी फिल्म में दी है वो काफी प्रेरणादायी है और उसने पूरे ओलंपिक कैंपेन में हमारा काफी साथ दिया।
उन्होंने कहा,'सबसे पहले मैं उनकी ओर से दिये गये मैसेज का धन्यवाद करता हूं, जिसने लड़कियों को प्रेरित करने का काम किया। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि चक दे 2 का निर्माण किया जाये, यह काफी बेहतरीन होगा।'

भारतीय टीम के साथ नहीं बढ़ायेंगे करार
इस बीच कोच मरीन ने साफ किया है कि वो भारतीय हॉकी टीम के साथ अपने करार को बढ़ाने की ओर नहीं देख रहे हैं और 4 साल भारत में बिताने के बाद वो अपने परिवार के पास लौटना चाह रहे हैं। मरीन ने भारत की महिला और पुरुष दोनों की हॉकी टीमों के साथ अलग-अलग स्तर पर काम किया है।
उन्होंने माई खेल से बात करते हुए कहा,' मैं 2022 के कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में महिला टीम के साथ मैदान पर नहीं रहूंगा। यह ओलंपिक मेरा आखिरी टूर्नामेंट था लेकिन मैं हर टूर्नामेंट का हर मैच अपने परिवार के साथ लाइनव देखूंगा। मैं करार को आगे बढ़ाने की ओर नहीं देख रहा क्योंकि मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा मेरा परिवार है और मैं उनके पास जाना चाहता हूूं। मैं भारत में बिताये अपने समय के लिये शुक्रगुजार हूं और मैं बाकियों को शुभकामना देता हूं क्योंकि अब उनका समय आ गया है।'

भारत में ज्यादा महिला टूर्नामेंट कराने की दरकार
भारतीय महिला हॉकी टीम के सबसे सफल कोच में शुमार मरीन का मानना है कि फिलहाल भारतीय टीम काफी अच्छे स्थान पर खड़ी है लेकिन उसे अगले दौर में पहुंचने के लिये ज्यादा टूर्नामेंट खेलने की जरूरत है। अगर भारतीय महिला टीम को आगे बढ़ना है तो उसके लिये ज्यादा टूर्नामेंट का आयोजन करना होगा।
उन्होंने कहा,'लड़कियां इस समय काफी अच्छी पॉजिशन में हैं लेकिन अभी भी हम उस जगह नहीं है जिसकी चाहत है। लड़कियों ने बड़े स्तर पर आकर शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन भारत में उनके पास अभी भी बहुत सारे टूर्नामेंट नहीं है। भारत में हॉकी इंडिया लीग सालों पहले हुआ करती थी और बड़े टूर्नामेंट आयोजित किये जाने में वक्त लगता है। मुझे लगता है कि इसमें समय लगेगा लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के अगले स्तर पर पहुंचने के लिये यह जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा महिला टूर्नामेंट का आयोजन किया जाये।'
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