Tokyo 2020: ओलंपिक में रवि दहिया ने जीता सिल्वर पदक तो जेल में रोने लगे सुशील कुमार, जानें क्या था कारण

Tokyo 2020
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नई दिल्ली। जापान की राजधानी टोक्यो में जारी ओलंपिक खेलों में गुरुवार को पहलवान रवि कुमार ने भारत के लिये दूसरा सिल्वर मेडल जीत कर करोड़ों भारतीय फैन्स को जश्न मनाने का मौका दिया है। रवि दहिया 57 किग्रा फ्री स्टाइल कुश्ती में गुरुवार को रूस के जवूर उगेव के खिलाफ उतरे, जहां पर उन्होंने फाइनल मैच में जबरदस्त प्रदर्शन किया लेकिन आखिरी मिनटों में रूसी पहलवान को पटकनी देने में नाकाम रहने की वजह से गोल्ड मेडल से चूक गये। फाइनल में 4-7 से हार का सामना करने वाले रवि कुमार को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।

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हालांकि इसके साथ ही वो ओलंपिक में भारत के लिये कुश्ती का सिल्वर मेडल हासिल करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गये हैं। रवि कुमार दहिया से पहले यह कारनामा सिर्फ सुशील कुमार के नाम था जिन्होंने 2012 के लंदन ओलंपिक्स में सिल्वर मेडल हासिल किया था जबकि 2008 के ओलंपिक खेलों में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था।

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रवि का प्रदर्शन देख भावुक हुए सुशील कुमार

रवि का प्रदर्शन देख भावुक हुए सुशील कुमार

फिलहाल सुशील कुमार दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं और गुरुवार को जब रवि कुमार फाइनल मैच में रूसी पहलवान का सामना करने उतरे तो सुशील कुमार जेल में बंद बाकी कैदियों के साथ टीवी पर इस मैच को देख रहे थे। मैच के बाद जब रवि कुमार को सिल्वर मेडल दिया गया तो सुशील कुमार जेल में भावुक हो गये और रोने लगे।

सुशील कुमार ने अपने भावुक होने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि देश के लिये ओलंपिक में पदक हासिल करना अपने आप में बड़ा सम्मान होता है और खिलाड़ी कई बार मौके मिलने के बाद एक पदक हासिल कर पाते हैं, वहीं पर रवि ने अपने पहले ही ओलंपिक खेलों में देश के लिये फाइनल तक का सफर तय किया और गोल्ड को हासिल करने से जरा सा चूक गया और सिल्वर लाया तो यह बहुत ही गर्व की बात है और इसी की वजह से मैं भावुक हूं।

डेब्यू ओलंपिक में रवि कुमार ने जीता सिल्वर मेडल

डेब्यू ओलंपिक में रवि कुमार ने जीता सिल्वर मेडल

उल्लेखनीय है कि रवि कुमार टोक्यो ओलंपिक में पहली बार भारत की ओर से कुश्ती का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे थे और अपने डेब्यू के दौरान ही सिल्वर मेडल हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गये हैं। सुशील कुमार ने भी भारत के लिये सिल्वर मेडल हासिल किया लेकिन उसे हासिल करने के लिये उन्हें 3 बार ओलंपिक का सफर तय करना पड़ा। सुशील ने अपने करियर का आगाज 2004 के एथेन्स ओलंपिक्स की खराब शुरुआत के साथ किया था जहां पर वो 60 किग्रा भारवर्ग में 14वें पायदान पर रहे थे। इसके बाद 2008 में जब वो दोबारा ओलंपिक पहुंचे तो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और 2012 में सिल्वर जीतकर 2 ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

वहीं पर दूसरी ओर रवि कुमार दहिया ने 2019 के विश्व चैम्पियनशिप में डेब्यू करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता और ओलंपिक्स में रूसी पहलवान के हाथों 4-7 से मिली हार के चलते सिल्वर पदक अपने नाम किया।

ओलंपिक में पदक जीतने वाले पांचवे पहलवान बने रवि

ओलंपिक में पदक जीतने वाले पांचवे पहलवान बने रवि

गौरतलब है कि रवि कुमार भारत के लिये ओलंपिक में पदक जीतने वाले चौथे पुरुष पहलवान तो वहीं पर ओवरऑल 5वें रेसलर बने हैं। उनके इस पदक के साथ ही ओलंपिक में लगातार चौथे साल भारत को कुश्ती में पदक मिला है। भारत के लिये दिग्गज पहलवान केडी जाधव ने 1952 के ओलंपिक खेलों में पहला ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था, जिसके बाद भारत को 56 सालों का इंतजार करना पड़ा और 2008 के बीजिंग गेम्स में सुशील कुमार ने ब्रॉन्ज जीतकर उस इंतजार को खत्म किया। वहीं पर 2012 के लंदन ओलंपिक्स में योगेश्वर दत्त ने भारत के लिये ब्रॉन्ज तो वहीं पर सुशील ने सिल्वर मेडल हासिल किया। 2016 के रियो ओलंपिक में भारत के लिये साक्षी मलिक ने पदक जीता और कुश्ती में पदक लाने वाली पहली और इकलौती महिला पहलवान बनी।

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Story first published: Thursday, August 5, 2021, 21:55 [IST]
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