नई दिल्ली। खेलों का महाकुंभ माने जाने वाले ओलंपिक के 32वें संस्करण का आगाज 23 जुलाई से जापान की राजधानी टोक्यो में किया जाना है, जिसको लेकर इस साल भारत से लगभग 125 खिलाड़ियों का दल रवाना होने वाला है। भारतीय फैन्स को इस साल ओलंपिक में अपने इतिहास के सबसे ज्यादा मेडल जीतने का भरोसा है। इस फेहरिस्त में हम उन खिलाड़ियों की सफलता की कहानी आप तक ला रहे हैं जिन्होंने ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करने का काम किया। आज हम ऐसे खिलाड़ी की बात करने जा रहे हैं जिसने सरहद पर दुश्मनों से अपने देश की रक्षा करने से लेकर साल 2012 में खेले लंदन ओलम्पिक्स में तिरंगा लहराया।
हम बात कर रहे है सूबेदार विजय कुमार की जिन्होंने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में भारत के लिये सिल्वर मेडल पर निशाना साधा। हिमाचल के हमीरपुर जिले के रहने वाले विजय कुमार ने साल 2001 में एक सिपाही के तौर पर फौज को ज्वाइन किया और 16वीं डोगरा रेजीमेंट के सदस्य बने। फौज में भर्ती होने के बाद विजय कुमार ने निशानेबाजी पर ध्यान लगाना शुरू किया और 2 साल बाद मध्यप्रदेश की आर्मी मार्क्समैन यूनिट का हिस्सा बन गये।
आर्मी मार्क्समैन यूनिट में फौज के सबसे बेहतरीन निशानेबाज शामिल होते हैं। विजय कुमार ने इस यूनिट में शामिल होने के साथ ही अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रख न सिर्फ पदोन्नति हासिल की बल्कि 2006 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिये 2 गोल्ड मेडल भी जीते। विजय कुमार ने 2006 के एशियन गेम्स में भी हिस्सा लिया और ब्रॉन्ज मेडल जीता।
खेलों में लगातार शानदार प्रदर्शन के लिये सरकार की ओर से 2007 में विजय कुमार को अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया। साल 2010 में जब कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत में की गई तो भारतीय दल ने रिकॉर्ड तोड़ पदक जीते, जिसमें विजय कुमार ने भी 3 गोल्ड और एक सिल्वर पदक अपने नाम किये। हालांकि विजय कुमार का निशाना ओलंपिक में भारत के लिये पदक हासिल करना था। 2008 के ओलंपिक खेलों में क्वालिफाई करने में नाकाम रहे विजय कुमार ने अमेरिका में आयोजित हुए आईएसएसएफ शूटिंग विश्व कप में सिल्वर मेडल जीतकर ओलंपिक में जगह बनाई।
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विजय कुमार ने लंदन ओलंपिक्स में बेहतरीन निशाना लगाया और क्वालिफिकेशन राउंड में चौथे नंबर पर रहकर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि उन्हें पता था कि देश के लिये पदक जीतना है तो इतना काफी नहीं है। फाइनल राउंड में सूबेदार विजय कुमार ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में 40 में से 30 अंक हासिल किये और गोल्ड मेडल जीतने वाले क्यूबा के ल्यूरिस प्यूपो से 4 अंक दूर रह गये। प्यूपो ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर गोल्ड मेडल जीता तो वहीं पर विजय कुमार ने भारत के लिये सिल्वर मेडल पर निशाना लगा दिया।
शूटिंग में भारत के पास अब तक ओलंपिक का गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल आ चुका था लेकिन विजय कुमार ने पहला सिल्वर मेडल जीता। लंदन ओलंपिक में तिरंगा फहराने के बाद विजय कुमार को 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय दल का ध्वजवाहक बनाया गया। साल 2017 में वो सेना से रिटायर हो गये, जिसके बाद हरियाणा सरकार ने उन्हें डीसीपी की पोस्ट दी।