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Tokyo Special: जब आजादी के बाद भारत ने लंदन में जाकर फहराया तिरंगा, जीता पहला ओलंपिक गोल्ड

Tokyo olympics
Photo Credit: By Dmuc - Personal PhotoPreviously published: Personal Photo, CC BY-SA 3.0

नई दिल्ली। दुनिया भर में फैली महामारी कोरोना वायरस के बीच खेलों के महाकुंभ ओलंपिक्स का आयोजन टोक्यो में 23 जुलाई से होने जा रहा है। इसको लेकर भारतीय दल भी पूरी तरह से तैयार है और इस साल 13 सालों से चले आ रहे गोल्ड मेडल के सूखे को खत्म करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच माइखेल की ओर से ओलंपिक्स के इतिहास में भारतीय खिलाड़ियों की गौरव गाथा को याद किया जा रहा है, जिसमें हम आज आजाद भारत के पहले गोल्ड मेडल की कहानी सुनायेंगे, जहां पर भारतीय टीम ने ब्रिटिश राज से आजाद होने के बाद लंदन में जाकर न सिर्फ तिरंगा लहराया बल्कि इंग्लैंड की टीम को धूल चटा कर ओलंपिक खेलों में अपना पहला गोल्ड मेडल जीतने का काम किया।

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15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के महज एक साल बाद 1948 में ओलंपिक खेलों के छठे संस्करण का आयोजन हुआ। 31 जुलाई से 13 अगस्त के बीच खेले जाने वाले इन खेलों में भारतीय दल ने सभी 39 खेलों में भाग लेने का काम किया, हालांकि इतिहास उसने पुरुषों के हॉकी में बनाया। ओलंपिक्स में भारत और इंग्लैंड का अभी तक कभी भी एक दूसरे के खिलाफ सामना नहीं हुआ था क्योंकि भारतीय खिलाड़ी अभी तक इंग्लैंड की टीम के अंडर ही ओलंपिक्स में भाग ले रहे थे, लेकिन यह पहली बार था जब आजादी के बाद दोनों टीमों का आमना-सामना होने वाला था।

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लीग मैच में भारत ने बनाया एकतरफा दबदबा

लीग मैच में भारत ने बनाया एकतरफा दबदबा

भारत की 22 सदस्यीय टीम का सामना लीग मैच में सबसे पहले ऑस्ट्रिया की टीम से हुआ। 31 जुलाई 1948 को हुए इस मैच में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रिया को 8-0 से हराने का काम किया। भारत के लिये बाबू के नाम से मशहूर हॉकी प्लेयर कुंवर दिग्विजय सिंह ने 2 गोल दाग कर भारत को पहले हाफ में बढ़त दिलाने का काम किया तो वहीं पर पैट्रिक जेंसन ने दूसरे हाफ में लगातार 4 गोल दागने का काम किया। वहीं पर किशन लाल और रेजिनाल्ड रोड्रिगेज ने भी एक-एक गोल दागे। इसके बाद भारतीय टीम का सामना 4 अगस्त को अर्जेंटीना से हुआ जिसमें एक बार फिर से भारतीय हॉकी टीम ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए अर्जेंटीना को 9-1 से मात दी। भारत के लिये इस मैच में बलबीर सिंह सीनियर ने 4 गोल दागे तो वहीं पर पैट्रिक जेंसन ने 3 गोल दागने का काम किया। किशन लाल ने भी 2 गोल दाग कर टीम को एकतरफा जीत दिलाई।

नीदरलैंडस के मजबूत डिफेंस को भारतीय टीम ने भेदा

नीदरलैंडस के मजबूत डिफेंस को भारतीय टीम ने भेदा

लीग के आखिरी मैच में भारत का सामना स्पेन से हुआ जहां पर भारतीय टीम ने त्रिलोचन सिंह बावा और बलवीर सिंह सीनियर की मदद से स्पेन को 2-0 से हराकर अंकतालिका में टॉप पर रहते हुए फिनिश किया। भारतीय टीम ने आजाद भारत में पहली बार सेमीफाइनल तक पहुंचने का काम कर दिया था और वो भी एकतरफा जीत के साथ। सेमीफाइनल मैच में भारतीय हॉकी टीम का सामना नीदरलैंडस से हुआ।

9 अगस्त 1948 को खेले गये इस मैच में भारतीय टीम को नीदरलैंडस के मजबूत डिफेंस का सामना करना पड़ा, जिसके चलते भारतीय टीम के लिये यह जीत आसान नहीं रही। भारत के लिये पैट्रिक जेनसेन ने पहला गोल दागा लेकिन नीदरलैंडस के जोहान ब्रोमबर्ग ने भारत के खिलाफ गोल दागकर टीम की वापसी कराई। हालांकि जब ऐसा लग रहा था कि मानों यह खेल पेनाल्टी शूटआउट में जायेगा तभी किशन लाल ने एक और गोल दागकर भारत को 2-1 से जीत दिलाने का काम किया।

अल्टीमेट फाइनल में ब्रिटेन को हराकर जीता भारत

अल्टीमेट फाइनल में ब्रिटेन को हराकर जीता भारत

जहां भारत ने नीदरलैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाने का काम किया तो वहीं पर ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने पाकिस्तान को 2-0 से हराकर अपनी जगह पक्की की। इसके साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल देखने की उम्मीद कर रहे लोगों का सपना अधूरा रह गया। हालांकि भारत को इतिहास रचने का मौका जरूर मिला। भारतीय टीम ने इस मैच में एक बार फिर से एकतरफा दबदबा बनाते हुए इंग्लैंड को 4-0 से रौंदने का काम किया और आजाद भारत में अपना पहला गोल्ड मेडल जीता। भारत के लिये बलबीर सिंह दोसांझ (सीनियर) ने 2 गोल दागे तो वहीं पर पैट्रिक जैनसेन और त्रलोचन सिंह बावा ने एक-एक गोल दागने का काम किया।

Story first published: Friday, June 25, 2021, 16:46 [IST]
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