अब क्रिकेट में नहीं इस्तेमाल किया जायेगा 'बैट्समैन' टर्म, जानें क्यों एमसीसी ने बदला यह नियम
नई दिल्ली। क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि क्रिकेट के खेल में महिला और पुरुष दोनों के खेलने के बावजूद बैटिंग करने वाले खिलाड़ी के लिये बैट्समैन शब्द का इस्तेमाल क्यों किया जाता है, अगर आपने इस बारे में सोचा है तो आपको भी इस बात का अहसास हुआ है कि क्रिकेट में भले ही महिलाओं को खेलने का मौका दिया है लेकिन उनका खुल कर स्वागत नहीं किया। सच तो यह है कि क्रिकेट में सदियों से 'बैटसमैन' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि इस दौरान लंबे समय तक महिलायें क्रिकेट के मैदान का हिस्सा नहीं थी।
मौजूदा समय में महिला क्रिकेट के लिये चीजें धीरे-धीरे बदल रही है, जहां पर ऑस्ट्रेलिया महिला टीम का एक अलग स्थान है तो वहीं पर इंग्लैंड क्रिकेट में सालों से पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों के लिये साथ-साथ लीग क्रिकेट का आयोजन किया है। साउथ अफ्रीका की महिला टीम की बात करें तो वो अपने देश की पुरुष टीम से ज्यादा मजबूत नजर आती है।
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इसको देखकर यह साफ नजर आता है कि क्रिकेट की दुनिया में बैट्समैन शब्द पर बैटवूमेन का पलड़ा भारी होता जा रहा है। इस बीच मैरिलबॉन क्रिकेट क्लब ने बुधवार (22 सितंबर) को क्रिकेट के इस बेहतरीन खेल में बदलाव का ऐलान किया है जिसके तहत क्रिकेट में जेंडर न्यूट्रल टर्म का इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया है।
नियमों में इस बदलाव के चलते अब से क्रिकेट के खेल में बैट्समैन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा, बल्कि उसकी जगह बैटर शब्द का इस्तेमाल किया जायेगा। यह बदलाव एमसीसी समिति की ओर से क्लब की स्पेशलिस्ट लॉ सब कमिटि के सुझाव पर किया गया है। एमसीसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इसका ऐलान किया है।
इसको लेकर एमसीसी की ओर से जारी की गई आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार यह फैसला क्रिकेट को ज्यादा समावेशी खेल बनाने के लिये किया है। यह बदलाव काफी लंबे समय से लंबित थे और इनका होना तय माना जा रहा था। एमसीसी ने अपने इस कदम को खेल के प्रति अपनी वैश्विक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया है। इस नियम का इस्तेमाल हर उस जगह किया जायेगा जहां पर बैट्समैन टर्म का इस्तेमाल किया जाता था।
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गौरतलब है कि रिलीज में बैटर शब्द के इस्तेमाल के साथ ही क्रिकेट का हिस्सा बनने वाला हर टर्म विकेटकीपर, बॉलर, फील्डर, मैच रेफरी, कॉमेंटेटर और बाकी के अन्य रोल जेंडर न्यूट्रल हो गये हैं। एमसीसी ने अपने बयान में कहा है कि हमारा मानना है कि क्रिकेट सभी के लिये है और यह मौजूदा समय के साथ बदल रहा है। बैटर शब्द के इस्तेमाल से हम खेल की लैंगिक खाई को खत्म करना चाहते हैं।
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