Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

अंकिता श्रीवास्तव: वो बेटी जिसने मां को दिया जीवन और तोहफे में दो-दो गोल्ड मेडल भी

नई दिल्ली। देश का नाम रोशन करने के लिए किसी को भी शारीरिक रूप से मजबूत होने की जरूरत नहीं है बल्कि हौंसलों से मजबूत और मानसिक रूप से मजबूत होने की जरूरत है। खेल के महाकुंभ ओलिम्पिक की ओर से हर दूसरे साल ऐसे ही खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिये वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स का आयोजन होता है। इन गेम्स की सबसे खास बात यह है कि इनमें वही खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं जिन्होंने अपने शरीर का कोई हिस्सा किसी जरूरतमंद को दान किया है।

शरीर का कोई भी अंग अगर भंग हो जाए तो हम अधूरा महसूस करते हैं। ऐसे में अपने अंग का दान करके हौंसलों की उड़ान भरने वाले खिलाड़ियों के लिए यह गेम्स सम्मान का उचित मंच है। अतंर्राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर आखिरकार देश का नाम रोशन करने वालों में एक भारतीय का नाम भी शामिल हो गया है। ऐसा करने वाली कोई और नहीं मध्य प्रदेश से आने वाली देश की एक बेटी है।

और पढ़ें: 4th T20, IND vs WI: 7 गेंद में थी 6 रन की दरकार, बना सिर्फ 1, भारत ने लगाया जीत का चौका

26 साल की अंकिता श्रीवास्तव ने इस साल ब्रिटेन के कैसल में आयोजित हुए वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में भारत के लिए विश्व रिकॉर्ड के साथ एक ही दिन में 2 गोल्ड जीतने का कारनामा किया। अंकिता ने पहले लंबी कूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हुए 3.61 मीटर की छलांग लगाई और करीब 3 घंटे बाद 31.7 मीटर दूर बॉल थ्रो करके वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में भारत का परचम लहराया। अंकिता ने ना केवल अपनी मां को जिंदगी दी बल्कि विश्व की प्रतिष्ठित स्पर्धा में दो-दो गोल्ड मेडल हासिल कर उन्हें एक बेहतरीन तोहफा भी दिया।

इससे पहले उन्होंने भारत के लिए 100 मीटर रेस में 15.31 सेकंड का समय निकालते हुए सिल्वर मेडल जीता था। अंकिता श्रीवास्तव की बदौलत पहली बार भारत ने वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स में पदक का खाता खोला और उसमें भी एक नहीं 3 पदक जीते। इतना ही नहीं अपने प्रदर्शन के दम पर अंकिता इन गेम्स में किसी देश के लिए 3 पदक जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी भी बनीं। अंकिता ने 6 प्रतियोगिता में भाग लिया था जिसमें से उन्होंने 3 में पदक हासिल किए।

लिवर दान कर मां को दिया नया जीवन
अपने बच्चों को जीवन दान देने वाली मां की जान बचाने के लिए अंकिता ने पांच साल पहले 2014 में अपने लीवर का 74% हिस्सा दान कर दिया था। अंकिता ने न सिर्फ अपनी मां की जान बचाई बल्कि खुद के हौंसलों को भी कमजोर नहीं होने दिया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम सुनहरे अक्षरों में लिख दिया। अंकिता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जिन्होंने 19 साल की उम्र में एक उद्दमी के रूप में अपनी पहचान बनाई। वह राष्ट्रीय स्तर पर स्विमिंग चैम्पियन भी रही हैं और एक किताब भी लिख चुकी हैं। सेंट जोसेफ स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली अंकिता ने कालेज से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया है।

वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स के लिए 14 सदस्यीय टीम चुने जाने के बाद उन्होंने साई सेंटर भोपाल में कोच अमित गौतम के मार्गदर्शन में जमकर अभ्यास किया था। ट्रांसप्लांट गेम्स टीम में चुने जाने से पहले वह नेशनल स्विमर रही हैं। उन्होंने स्विमिंग में प्रदेश के लिए पदक जीते हैं।अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इस टूर्नामेंट की शुरुआत 1978 में हुई थी, जहां इसे पहले 3 साल लगातार आयोजित किया गया। इसके बाद ओलम्पिक एसोशिएशन ने इसे हर 2 साल बाद आयोजित करने का फैसला किया। साल 2019 में इन गेम्स में 59 देशों के 2027 खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया।

Story first published: Monday, November 18, 2019, 17:54 [IST]
Other articles published on Nov 18, 2019
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+