
पावरप्ले के दौरान फील्डिंग रिस्ट्रिक्शन्स
वनडे क्रिकेट के इतिहास में साल 2005 से पहले 15 ओवर का पॉवरप्ले फेंका जाता था जिसमें फील्डिंग करने वाली टीम को 2 फील्डर कैचिंग पोजिशन पर खड़ा करना लाजमी होता था। आईसीसी के इस नियम के चलते बल्लेबाजों को अपने आक्रामक शॉट खेलने में आसानी होती थी। हालांकि साल 2005 में पावरप्ले के दौरान 15 ओवर को कम करके 10 कर दिया गया, जबकि साल 2012 में फील्डिंग रिस्ट्रिक्शन्स को भी हटा लिया गया। अगर यह नियम पहले हटा लिया गया होता तो कई बल्लेबाजो को तेजी से रन बनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।

बाई रनर लेने पर बैन
वनडे क्रिकेट में 2011 से पहले बल्लेबाजों के पास बाई रनर के रूप में एक बड़ी सुविधा दी गई थी जिसका उपयोग अक्सर मैदान पर खिलाड़ी करते हुए भी दिखाई देते थे। यह बाई रनर बल्लेबाज को चोटिल होने और मैदान पर भाग न सकने की स्थिति में दिया जाता था। इसके चलते बल्लेबाज कई बार जब थकने लगते तो वह बाई रनर को मैदान पर बुला लेते और वो उनकी जगह रन दौड़ने का काम करते।
पिछले समय के खिलाड़ियों की फिटनेस लेवल को ध्यान में रखा जाये तो अगर बाई रनर पर पहले बैन लगाया जाता तो कई खिलाड़ियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता न सिर्फ मैदान पर बल्कि खुद की फिटनेस पर भी ताकि वह बिना रनर के भी अच्छा कर सकें।

गेंदबाजी में बाउंसर फेंकने की छूट
आईसीसी ने क्रिकेट के खेल में जो क्रांतिकारी बदलाव किये उनमें से एक सबसे अहम बदलाव गेंदबाजों को ओवर के दौरान बाउंसर फेंकने की मंजूरी देने का था। साल 2001 से पहले वनडे क्रिकेट में गेंदबाज को एक भी बाउंसर फेंकने की इजाजत नहीं थी। हालांकि उसके बाद जब इसकी इजाजत मिली तो कई खिलाड़ियों पर बुरा असर देखने को मिला।
ऑस्ट्रेलिया के बेस्ट फिनिशर माइकल बेवन और भारतीय टीम के तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के करियर में तो इसका सीधा असर देखने को मिलता है। जहां माइकल बेवन को आउट करने के लिये बाउंसर आसान गेंद बन गई तो वहीं सौरव गांगुली को कई अहम मौकों पर इसके चलते अपनी विकेट गंवानी पड़ी। तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाउंसर के इस्तेमाल की छूट ने किस तरह से क्रिकेट को बदल दिया था। वहीं अक्टूबर 2012 के बाद से गेंदबाजों को एक ओवर में 2 बाउंसर गेंद फेंकने की छूट मिल चुकी है जिससे गेंदबाज और भी खतरनाक हो गये हैं।

पारी के दौरान 2 नई गेंदों का इस्तेमाल
साल 2011 से पहले वनडे क्रिकेट में केवल एक ही गेंद से पूरी पारी कराई जाती थी लेकिन मौजूदा समय में 2 नई गेंदों का इस्तेमाल किया जाता है। अगर यह नियम पहले बदल जाता तो पुरानी पीढ़ी के खिलाड़ियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती। पारी के दौरान 2 नई गेंदों के इस्तेमाल से गेंदबाज को अब देर तक स्विंग कराने का मौका मिलता है, जिसके चलते बल्लेबाजों को ज्यादा संभलकर बल्लेबाजी करनी पड़ती है। जबकि इस नियम से पहले गेंद सिर्फ 6-7 ओवर तक ही स्विंग करती थी। यही वजह है कि पुराने बल्लेबाजों को आज भी दो नए गेंद के नियम से बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।


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