
1.सबसे खराब टीम कॉम्बीनेशन
हालांकि टीम इंडिया ने अपने अब तक खेले 8 मैचों में से कल छठी जीत दर्ज की लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि कल टीम इंडिया ने जो कॉम्बीनेशन खिलाया वो अब तक का सबसे खराब था। मध्यक्रम में बल्लेबाजी के जो सवाल पिछले कुछ मैचों से उठे थे, उनके उत्तर अभी भी कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट के पास नहीं हैं। शिखर धवन और विजय शंकर के चोटिल होने के बाद स्थिति और खराब हो गई है क्योंकि आगे के दौर के मैच कठिन साबित होने वाले हैं और उनमें हर बार नया प्रयोग करने की गुंजाइंश टीम मैनेजमेंट के पास नहीं होगी।

2. प्लेइंग 11 में तीन विकेटकीपर बल्लेबाजों पर सवाल
बांग्लादेश के खिलाफ उतरी टीम में तीन विकेटकीपर बल्लेबाजों को शामिल किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर के एल राहुल को भी शामिल कर लें तो ये संख्या चार हो जाती है। महेंद्र सिंह धोनी, रिषभ पंत, दिनेश कार्तिक को मध्य क्रम को मजबूत करने के लिए खिलाया गया। लगता है टीम इंडिया ने ऐसा मजबूरी में किया जो कि अच्छा संकेत नहीं है। आगे के नॉकआउट दौर में कोहली के लिए ये समस्या बड़ी विकट हो सकती है।
पंत और कार्तिक के जरिये मध्यक्रम की भरपाई करने की कोशिश करने का सीधा मतलब है कि इस स्लॉट की अगुवाई करने के लिए भारत के पास कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज नहीं है। भारत की इस कमजोरी का फायदा, आगे के मैचों में विरोधी टीमें उठा सकती हैं। इस स्लॉट के लिए किसी विशेषज्ञ बल्लेबाज की किल्लत को देखते हुए आजिंक्य रहाणे जैसे तकनीकी तौर पर दक्ष बल्लेबाज को कॉल किया जा सकता था। विजय शंकर की जगह मयंक अग्रवाल को बुलाए जाने के पीछे की सोच पर भी सवाल खड़े होते हैं। रहाणे जो कि मौजूदा वक्त में इंग्लैंड में हैं और हैम्पशायर के लिए खेल रहे हैं, उनकी जगह मयंक अग्रवाल को बुलाया गया जो कि वनडे मैच में अभी अपनी ईनिंग की शुरुआत करेंगे वो भी सीधे वर्ल्डकप से। बहुत सारे हिट और मिस बैट्समैन्स की इस टीम कॉम्बीनेशन के ऐन मौकों पर ना चलने के खतरे का साफ भांपा जा सकता है।
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3. केवल पांच गेंदबाजों के खेलना है रिस्की
बांग्लादेश के खिलाफ भारत केवल पांच विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ मैदान में उतरा, ये भी एक खतरे की निशानी है। बचे हुए 6 खिलाड़ियों में से किसी के पास बॉलिंग का बहुत अच्छा अनुभव नहीं था। अगर इन पांच गेंदबाजों में से कोई एक नहीं चला तो फिर टीम इंडिया को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि मंगलवार को बांग्लादेश के खिलाफ मोहम्मद शमी के साथ हुआ। बांग्लादेश के खिलाफ टीम इंडिया भाग्यशाली रही कि शमी का कोटा खत्म होने से पहले जसप्रीत बुमराह औऱ भुवनेश्वर कुमार ने डेथ ऑवर्स में महत्वपूर्ण विकेट ले लिए वरना टीम इंडिया मुश्किल में पड़ सकती थी। शमी ने अपने नौ ओवर्स के कोटे में 68 रन खर्च किए और निचले क्रम के बल्लेबाजों ने भी उनकी जमकर ठुकाई की। आशा है कि कोहली अपनी गलतियों से सीखेंगे और टूर्नामेंट के इस महत्वपूर्ण दौर में इस तरह की गलतियां करने से बचेंगे।

4. दिनेश कार्तिक की जगह रवींद्र जडेजा क्यों नहीं?
अचरज की बात ये है कि भरपूर टैलेंट और जरूरत होने के बाद भी रवींद्र जडेजा को टीम में नहीं खिलाया गया। आंकड़ों पर भी गौर करें तो लेफ्ट आर्म स्पिनर और ऑल राउंडर रवींद्र जडेजा का बैटिंग औसत और स्ट्राइक रेट दिनेश कार्तिक से कहीं ज्यादा है। वो बढ़िया गेंदबाजी करते हैं और वो एक शानदार फील्डर भी हैं। ये बात खुल्मखुल्ला है कि टीम इंडिया मध्यक्रम पर संघर्ष कर रही है, ऐसे में जबकि उसकी भरपाई को दो-दो तीन-तीन विकेट कीपर बल्लेबाजों को लिया जा सकता है तो रवींद्र जडेजा क्यों नहीं, जो कि एक अतिरिक्त गेंदबाज का विकल्प भी बन सकते हैं। स्पेशलिस्ट बैटसमेन के विकल्प के तौर पर एक ऑलराउंडर को खिलाना ज्यादा समझदारी भरा फैसला हो सकता है। अगर कार्तिक की जगह जडेजा को बांग्लादेश के खिलाफ खिलाया गया होता तो एक छठे गेंदबाज के तौर पर भरपाई होती जो कि वनडे में 174 विकेट ले चुका है। वो पांच विशेषज्ञ गेंदबाजों के कवर के तौर पर भी काम आ सकते थे। मध्यक्रम में अच्छी बल्लेबाजी तो कर ही सकते हैं और शानदार फील्डर तो हैं ही।
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5. धोनी को नंबर चार पर भेजने में क्या बुराई है?
लगता है कि धोनी अब टीम इंडिया के लिए पनौती बन गए हैं। धोनी एक बार फिर संघर्ष करते हुए नजर आए जो कि साफ बताता है कि उनका सुनहरा टाइम अब पीछे छूट चुका है। ऐस नाजुक मोड़ पर उन्हें टीम से ड्रॉप करना तो समझदारी नहीं होगी लेकिन उन्हें बल्लेबाजी क्रम में ऊपर लाने का दांव खेलकर उनका फायदा उठाया जा सकता है। उन्हें नंबर चार पर उतारकर, ऊपरी क्रम के बल्लेबाजों की तरफ से रखी गई नींव को वो आगे बढ़ाएं जबकि हार्ड हिटर्स को नंबर पांच पर भेजा जाए। अगर ऊपर के तीन बल्लेबाज अच्छा स्कोर बना जाते हैं तो पंत या पांड्या को नंबर चार पर प्रमोट किया जा सकता है लेकिन बूढ़े हो रहे धोनी को इतने नीचे उतारकर उनसे ठोका-ठाकी की उम्मीद करना अब भारत के हित में नहीं लगता।


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