
विदेशी स्पिनर अब हमको डराने लगे हैं
पिछले कुछ समय से जिस तरह से भारतीय बल्लेबाज नाथन लियोन, मोइन अली जैसे स्पिनरों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए हैं उससे बीसीसीआई ने अपनी इस पॉलिसी पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है। बीसीसीआई ने रणजी सीजन शुरू होने से पहले ही विचार करना शुरू कर दिया था कि भारतीय पिचों को भी विदेशी पिचों जैसा संतुलन दिया जाए।
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स्पिन खेलने के महारथी नहीं रहें हम
अक्सर देखा गया है कि या तो भारतीय पिचे स्पिनरों की मददगार होती है या फिर उनको विशेष तौर पर तेज गेंदबाजों के लिए तैयार किया जाता है। पिछले कुछ सालों से लगातार तेज गेंदबाजों को ध्यान में रखकर पिचे तैयार की जा रही हैं जिस कारण भारतीय बल्लेबाजों में बेहतरीन स्पिन गेंदबाजी को खेलने की वो महारत नजर नहीं आ रही है जो कभी सचिन तेंदुलकर के जमाने में नजर आती थी।

अच्छे स्पिनर भी तो खोजने हैं
इसलिए बोर्ड का मानना है कि इस तरह की पिचों का निर्माण करने दिया जाए जिसमें स्पिनरों के लिए अच्छी मदद हो ताकि रणजी सत्र में घरेलू बल्लेबाज फिर से बढ़िया स्पिन गेंदबाजी का सामना करने का अभ्यास कर ले ताकि एक बार फिर से हम दुनिया के बढ़िया स्पिनरों को उसी बेखौफी से खेलने की आदत डाल ले जिसके लिए भारतीय बल्लेबाज जाने जाते हैं।
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सामने है दोहरी चुनौती
उल्लेखनीय है कि जब हम घूमती हुई पिचों पर खेलने के आदी थे तो हमको अच्छी तेज गेंदबाजी खेलने में समस्या आती थी। ये समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है, जबकि इसके चक्कर में हम अपनी परंपरांगत ताकत को भी खोते जा रहे हैं। ऐसे में बीसीसीआई के सामने ये दोहरी चुनौती है कि वो कैसे तेज गेंदबाजी और स्पिन में संतुलन बैठाता है।


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