
ईशांत की जबरदस्त फार्म के मायने-
जिस हिसाब से ईशांत की फिटनेस और फार्म चल रही है उसको देखते हुए वे अपने करियर के चरम पर कहे जा सकते हैं। ऐसे में दिलचस्पी उभरती है कि क्या ईशांत एक गुमनाम गेंदबाज की कगार से भारत के सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज बनने का करिश्मा कर सकते हैं? ईशांत ने पिछले साल 2018-19 में 66 विकेट लिए हैं जिसमें उन्होंने 2018 में 21.80 के औसत से 41 तो इस साल केवल 15.56 के औसत से 25 विकेट लिए हैं। ईशांत पिछले 13 सालों से क्रिकेट में सक्रिय हैं और पिछले दो सालों में उनका गेंदबाजी औसत करियर में बेस्ट है। निश्चित तौर पर पूरी भारतीय तेज गेंदबाजी के कायापल्ट में ईशांत के इस सुधरे हुए खेल का बड़ा योगदान है।
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क्या टूटेगा कपिल का बेमिसाल टेस्ट रिकॉर्ड?
कपिल के रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए ईशांत को लगातार खेलना होगा। जिस उम्र और अनुभव में वे हैं उसको देखते हुए माना जा सकता है कि वे 4-5 साल और टेस्ट क्रिकेट खेल सकते हैं। इस दौरान उनको ना केवल विदेशों में बल्कि भारतीय जमीन पर भी विकेट लेने होंगे। इस मामले में 1 जनवरी 2018 से अब तक ईशांत का रिकॉर्ड भारत में कमाल का रहा है। उन्होंने इस अवधि में भारत में 5 टेस्ट मैच खेले हैं और 16.61 के औसत से 18 विकेट लिए हैं। इतना ही नहीं कोहली की कप्तानी में ईशांत ने भारत में 15 टेस्ट खेले हैं जिसमें उन्होंने 27.8 के औसत के साथ 36 विकेट लिए हैं। ये एक ऐसा प्रदर्शन है जिसको विदेशी दौरे के साथ जारी रखते हुए ईशांत हर साल कपिल के रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकते हैं।

पिछले दो सालों ने जगाई बड़ी उम्मीद-
ईशांत ने पिछले दो साल में 17 टेस्ट खेले हैं जिसमें लगभग 4 विकेट प्रति टेस्ट के हिसाब से उनको विकेट मिले हैं। अगर ईशांत 8-9 टेस्ट एक साल में खेलते हैं और उनकी इसी दर से विकेट मिलते रहते हैं तो कपिल के रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए कम से कम 35-36 टेस्ट खेलने होंगे जिसका मतलब होगा कि उनको पूरे चार-पांच और लगातार टेस्ट क्रिकेट खेलना होगा। इसके लिए ईशांत की फिटनेस बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यानी अगर वे इसी रफ्तार से बढ़ते रहे तो 35 साल तक की उम्र तक भारत के सबसे सफल तेज गेंदबाज बन सकते हैं। ईशांत ने ऐसा किया तो ये क्रिकेट इतिहास की बड़ी उपलब्धि की कहानी में शुमार होगी। कपिल देव ने भारत के 17 सालों तक क्रिकेट खेलकर 131 टेस्ट खेले थे और 29.65 के साथ 434 विकेट लिए थे।
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केवल एक चीज आ सकती है आड़े-
ध्यान देने वाली बात यह है कि कपिल का टॉप प्रदर्शन या तो शुरुआती दौर में आया या फिर करियर की मध्य स्टेज में। साल के अंतिम चार सालों में कपिल का प्रदर्शन स्थिर हो चुका था, वह ना घटा था और ना ही बढ़ा था लेकिन ईशांत अपने करियर में अब पीक कर रहे हैं। उन्होंने डेब्यू से लेकर साल 2017 तक 36.55 की औसत के साथ गेंदबाजी की थी तो वहीं साल 2018 से अब तक 19.79 के औसत से कहर बरपाया है। दूसरे इस समय भारतीय टीम में तेज गेंदबाजों का दौर चल रहा है जो समूह में एक दूसरे के साथ विकेट लेते हैं। इस माहौल में भी ईशांत को काफी सहायता मिलने की उम्मीद है। ऐसे में केवल उनके सामने एक ही चुनौती मुंह बाए खड़ी है जो उनको कपिल के रिकॉर्ड से दूर कर सकती है और वह है फिटनेस। एक बढ़ती हुई उम्र के तेज गेंदबाज के लिए करियर में सबसे मुश्किल उसकी गिरती हुई फिटनेस को संभालना ही होता है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ईशांत इससे किस तरह उभरते हैं।


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