नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार गुंडप्पा विश्वनाथ अपने जमाने के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में से एक थे। 70 के दशक में अपने जमाने के स्टायलिश बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ सुनील गावस्कर के साथ भारतीय टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ माने जाते रहे हैं। शनिवार को गुंडप्पा विश्वनाथ ने करियर के उस किस्से को याद किया जब पाकिस्तान के खिलाफ 1982-83 सीरीज के बाद अचानक से बाहर कर दिया गया।
अपने जमाने में दुनिया के सबसे शानदार गेंदबाजों के सामने बेहतरीन पारियां खेलने वाले गुंडप्पा विश्वनाथ को इस सीरीज के बाद वापसी करने का मौका नहीं मिला। पाकिस्तान के खिलाफ 37 साल पहले हुई इस सीरीज के बारे में बात करते हुए विश्वनाथ ने कहा कि उनके साथ वैसा ही हुआ था जैसा कि 2019 विश्व कप से पहले अंबति रायडु के साथ हुआ।
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इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सही है कि पाकिस्तान के खिलाफ 6 टेस्ट मैचों की सीरीज में मेरा प्रदर्शन खराब रहा हालांकि उसके बाद उन्हें मौका ही नहीं दिया गया कि वह वापसी कर सकें।
एक शो में बात करते हुए उन्होंने कहा,' मुझे बाहर किया गया तो मैं बहुत दुखी था। उस समय तीनों पारियों में मैने खराब फैसले लिए। यह खेल का हिस्सा है लेकिन उन हालात में दो पारियों में मैं अच्छा खेलता तो मुझे निकाला नहीं जाता। कपिल की कप्तानी का ऐलान नहीं हुआ था लेकिन सभी को पता था।'
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उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज के बाद विश्वनाथ को न तो वेस्टइंडीज दौरे के लिए चुना गया और न ही फिर उन्हें 1983 की विश्व कप टीम के लिये चुना गया।
अपने करियर के बेहतरीन कप्तानों के बारे में बात करते हुए गुंडप्पा विश्वनाथ ने बताया कि कर्नाटक के लिये खेलते हुए ईरापल्ली प्रसन्ना और भारत के लिये मंसूर अली खान पटौदी ने उनका काफी साथ दिया।
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उन्होंने कहा,'प्रसन्ना ने शुरू में मेरी हौसलाअफजाई की। पटौदी हैदराबाद के लिए रणजी ट्रोफी खेल रहे थे। मैं उनके खिलाफ खेल रहा था और तब उन्होंने मुझे करीब से खेलते देखा। न्यूजीलैंड के खिलाफ 1968 में मुझे अध्यक्ष एकादश के लिए खेलने का मौका मिला। चंदू बोर्डे कप्तान थे और उन्होंने पटौदी से मेरे नाम की सिफारिश की।'